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लखनऊ में यूपी हेल्थ टेक कॉन्क्लेव 1.0 का शुभारंभ

लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को लखनऊ के होटल क्लार्क अवध में यूपी हेल्थ टेक कान्क्लेव 1.0 का शुभारंभ किया। उद्घाटन करने के बाद मुख्यमंत्री ने भरोसा दिया कि उत्तर प्रदेश हेल्थकेयर और मेडिकल टेक्नोलाजी हब बनेगा।

सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बीमारी की पहचान की प्रक्रिया को स्मार्ट फोन ने और आसान कर दिया है। स्मार्टफोन और कृत्रिम बुद्धिमता (एआइ) से टीबी की स्क्रीनिंग आसान हो गई है। टेलीकंसल्टेंसी के माध्यम से सामान्य मरीज, जिसे वायरल फीवर, सर्दी जुकाम के रोगियों को उनके घर के पास, हेल्थ वेलनेस सेंटर, ग्राम सचिवालय पर ही दी जा सकती है। इससे बड़े स्वास्थ्य केंद्रों पर गंभीर मरीजों का समय नहीं खराब हो रहा है। प्रदेश को चिकित्सा तकनीक, स्वास्थ्य देखभाल में नवाचार और फार्मा निर्माण का राष्ट्रीय और वैश्विक हब बनाने की दिशा में सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ रही है।

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कोरोना काल में देखा गया कि दुनिया आपके साथ किस तरह का व्यवहार करती है। जब संकट की घड़ी होती है तो, हर व्यक्ति अपनी मनमानी करता है। कोविड काल खंड में हमने देखा कि लंबे समय तक आपूर्ति को बाधित किया गया। सेमीकंडक्टर हमें नहीं मिल पा रहे थे। उसकी वजह से इलेक्ट्रानिक उत्पाद नहीं बन पा रहे थे। अब हम लोगों को भी इस दिशा में आगे बढ़ना होगा। इससे भारत और उत्तर प्रदेश सबसे बड़ा हेल्थकेयर और मेडिकल टेक्नोलाजी हब बन सकता है। उन्होंने उद्यमियों से कहा कि उत्तर प्रदेश में हम आपको सुरक्षा, इंफ्रास्ट्रक्चर और सिंगल विंडो सिस्टम देंगे। यूपी सरकार आप सबके पाजिटिव रिस्पांस के लिए सदैव आपके साथ है।

उत्तर प्रदेश सबसे बड़ा बाजार

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश उपभोक्ताओं का सबसे बड़ा बाजार है। 25 करोड़ आबादी के साथ ही पड़ोसी राज्य व देशों की स्वास्थ्य सुविधाओं का भार उत्तर प्रदेश पर आता है। भारत सरकार का साथ मिलने से स्वास्थ्य के क्षेत्र में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी-पीएचसी), हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के माध्यम से दूरदराज के क्षेत्रों में भी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

उन्होंने कहा कि जब प्रधानमंत्री आयुष्मान योजना नहीं थी, तब बीमारी होने पर पूरा परिवार कांप उठता था। वर्ष 2014 से पहले ऐसे परिवार पैसा खत्म होने पर मरीज को लेकर घर चले जाते थे। अब 5.5 करोड़ गोल्डन कार्ड के माध्यम से लोगों को पांच लाख रुपये तक इलाज मुहैया कराया जा रहा है। पात्रता की श्रेणी में होने के बावजूद जिनका कार्ड नहीं बना था, उन्हें मुख्यमंत्री आरोग्य योजना से लाभ पहुंचाया जा रहा है। स्वास्थ्य के क्षेत्र का आधारभूत ढांचा मजबूत होने से मातृ मृत्यु दर, शिशु मृत्यु दर और संस्थागत प्रसव को राष्ट्रीय स्तर के आंकड़ों तक पहुंचाया गया है। उन्होंने कहा कि तकनीक का उपयोग करके ईज आफ लिविंग और सार्वभौमिक स्वास्थ्य के लक्ष्य को पाना है। यमुना अथारिटी में मेडिकल डिवाइस पार्क और ललितपुर में प्रोमोट फार्मा पार्क विकसित किया जा रहा है।

एकीकृत चिकित्सा अनुसंधान प्रणाली का किया लोकार्पण

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रिमोट का बटन दबाकर एकीकृत चिकित्सा अनुसंधान अनुप्रयोग प्रणाली (यूपीआइएमआरएएस) साफ्टवेयर का लोकार्पण किया। यह एकीकृत डिजिटल प्लेटफार्म क्लीनिकल ट्रायल, फार्मास्यूटिकल्स और मेडिकल डिवाइस से जुड़े अनुसंधान कार्यों को सरल, पारदर्शी, समयबद्ध बनाने के लिए किया गया है। अब शोधकर्ता अनुसंधान संबंधी आवश्यकताएं, प्रस्ताव और अनुमतियां आनलाइन प्रस्तुत कर सकेंगे। इंस्टीट्यूशनल एथिक्स कमेटी (आइईसी) से अनुमोदन, समीक्षा और निगरानी की प्रक्रिया भी इसी प्लेटफार्म पर होंगे। इस मौके पर इंस्टीट्यूशनल एथिक्स कमेटी के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) की पुस्तक का विमोचन भी किया। इसमें 22 प्रकार एचओपी का संकलन किया गया है।

तक्षशिला विश्वविद्यालय के योगदान को सराहा

मुख्यमंत्री ने तक्षशिला विश्वविद्यालय का इतिहास 2,500 वर्ष पुराना है। इसका नाम भरत के पुत्र तक्ष पर रखा गया है। व्याकरण के ज्ञाता पणिनि और चाणक्य जैसे अर्थशास्त्री उसी विश्वविद्यालय की देन है। जब ऐसे केंद्र बनते हैं तो वो केवल शिक्षाक, नवाचार, शोध के केंद्र नहीं पूरी व्यवस्था के स्वर्ण युग की ओर ले जाने का आधार बनते हैं। उन्होंने कहा कि वहां औषधि वैज्ञानिक वैद्य जीवक थे। उन्होंने कहा था कि ”नास्ति मूलमनौषधम्” यानि कोई भी वनस्पति ऐसी नहीं, जिसमें औषधीय गुण न हों। यही उनका प्रमाण था कि वह समाज की सेवा के योग्य हो गए हैं। उसी तरह भारतीय मनीषा मानती है कि ”अयोग्य: पुरुषो नास्ति” यानि कोई व्यक्ति अयोग्य नहीं होता, यदि एक योग्य योजक नहीं है तो कोई अयोग्य नहीं है।

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