हैदराबाद: बिहार सरकार ने राज्य के ग्रामीण इलाकों में रोजगार के नए अवसर पैदा करने और पर्यटन को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है. राज्य कैबिनेट ने ‘मुख्यमंत्री होमस्टे प्रोत्साहन योजना 2026’ को आधिकारिक मंजूरी दे दी है. इस योजना का मुख्य उद्देश्य गांवों में रहने वाले लोगों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है. इसके तहत ग्रामीण क्षेत्र के लोग अपने घरों के खाली कमरों को पर्यटकों के ठहरने के लिए ‘होमस्टे’ में बदल सकते हैं, जिसके लिए सरकार ₹11 लाख तक की वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है.
किसे और कितनी मिलेगी आर्थिक मदद?
पर्यटन विभाग के अनुसार, होमस्टे विकसित करने के लिए प्रति कमरे ₹2.5 लाख की दर से अधिकतम चार कमरों के लिए सब्सिडी दी जाएगी. सामान्य श्रेणी के आवेदकों को अधिकतम ₹10 लाख तक की कैपिटल सब्सिडी मिलेगी. वहीं, महिला उद्यमियों, स्वयं सहायता समूहों (SHGs) और 18 से 25 वर्ष के युवा स्टार्टअप्स को प्रोत्साहित करने के लिए प्रति कमरे ₹25,000 की अतिरिक्त सहायता का प्रावधान किया गया है. इस विशेष श्रेणी के तहत कुल सब्सिडी की राशि ₹11 लाख तक पहुंच सकती है. यह पूरी राशि एकमुश्त अनुदान के रूप में होगी, जिसे लाभार्थियों को सरकार को वापस नहीं लौटाना होगा.
योजना की मुख्य शर्तें और पात्रता
इस महत्वाकांक्षी योजना का लाभ केवल उन्हीं लोगों को मिलेगा जिनका घर चयनित पर्यटन स्थलों के 5 किलोमीटर के दायरे में स्थित है. शुरुआती चरण में बिहार के 16 प्रमुख जिलों (जैसे पटना, गया, नालंदा, वैशाली और पश्चिमी चंपारण) के 34 पर्यटन केंद्रों को इसमें शामिल किया गया है. योजना के नियमों के मुताबिक, सरकारी कर्मचारियों और संविदा कर्मियों को इस योजना से बाहर रखा गया है. इसके अलावा, सब्सिडी का लाभ लेने वाले संचालकों के लिए कम से कम 5 वर्षों तक होमस्टे का अनिवार्य रूप से संचालन करना आवश्यक होगा.
पूरी तरह ऑनलाइन होगी आवेदन प्रक्रिया
इच्छुक आवेदक बिहार पर्यटन विभाग के आधिकारिक वेब पोर्टल tourism.bihar.gov.in पर जाकर ऑनलाइन पंजीकरण कर सकते हैं. आवेदन के लिए आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक खाता विवरण और भूमि स्वामित्व (LPC) के दस्तावेज अनिवार्य हैं. पोर्टल पर मोबाइल नंबर के जरिए साइन-अप करने के बाद सभी विवरण और दस्तावेज अपलोड करने होंगे. आवेदन जमा होने के बाद विभाग के अधिकारियों द्वारा भौतिक सत्यापन किया जाएगा, और मंजूरी मिलते ही सहायता राशि तीन आसान किस्तों में सीधे आवेदक के बैंक खाते में भेज दी जाएगी. सरकार की इस पहल से न केवल बिहार के ग्रामीण पर्यटन को नई पहचान मिलेगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर स्वरोजगार का सृजन होगा.


