मुफ्ती अब्दुल मोमिन कासमी की सरपरस्ती में आयोजित तरावीह में सैकड़ों अकीदतमंद हुए शामिल
उलेमाओं ने बताई रमजान और कुरान की फज़ीलत
मोहम्मद आलम
अयोध्या। माह-ए-रमज़ान का आखिरी अशरा शुरू होते ही अकीदतमंदों में इबादत का जज़्बा और बढ़ गया है। मस्जिदों में नमाज, तिलावत और तरावीह के साथ कुरान पाक के दौर मुकम्मल होने का सिलसिला जारी है। इसी क्रम में फैज़ाबाद के मोहल्ला नियावां स्थित मस्जिद कुबा में तरावीह की नमाज़ के दौरान कुरान पाक का दौर पूरा किया गया, जिसमें आस-पास के इलाकों से बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।
कार्यक्रम का आयोजन मुफ्ती अब्दुल मोमिन कासमी के नेतृत्व में हुआ। इस अवसर पर उलेमाओं ने रमजान और कुरान की अहमियत पर रोशनी डालते हुए लोगों को नेक रास्ते पर चलने और इबादत बढ़ाने की नसीहत दी।
कारी इरफान अहमद हलीमी ने अपने संबोधन में कहा कि रमजान वह मुबारक महीना है जिसमें कुरान पाक नाज़िल हुआ, इसलिए इस महीने की अहमियत दूसरे महीनों से कहीं अधिक है। उन्होंने बताया कि जिस रात कुरान नाज़िल हुआ, वह रात लैलतुल कद्र के नाम से जानी जाती है और उस रात की इबादत हजार महीनों की इबादत से बेहतर मानी गई है। उन्होंने कहा कि जो इंसान कुरान की शिक्षाओं के अनुसार अपनी ज़िंदगी गुजारता है, उसे दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी मिलती है।
मुफ्ती अहमद आरिफ हसन कासमी ने कहा कि दुनिया में सबसे ज्यादा पढ़ी जाने वाली किताब कुरान पाक है, जो इंसानियत को सही रास्ता दिखाने वाली मुकम्मल रहनुमाई करती है। वहीं मुफ्ती जियाउद्दीन कासमी ने सहाबा-ए-किराम की मिसाल देते हुए कहा कि उन्होंने कुरान की शिक्षाओं के अनुसार जीवन बिताकर पूरी दुनिया में इस्लाम की रोशनी फैलाई और यह साबित किया कि कुरान के बताए रास्ते पर चलने वाला कभी नाकाम नहीं होता।
मुफ्ती अब्दुल मोमिन कासमी ने कहा कि इस्लाम रमजान के महीने में गरीबों, जरूरतमंदों और मजलूमों की मदद करने की खास ताकीद करता है। उन्होंने कहा कि इस्लाम इंसानियत, बराबरी और आपसी भाईचारे का पैगाम देता है और पड़ोसियों की मदद करने की सीख देता है, चाहे वह किसी भी धर्म या जाति के क्यों न हों।
कार्यक्रम के समापन पर मुफ्ती अफज़ाल ने दुआ कराई। इसके बाद मौजूद लोगों ने हाफिज मोमिन को गले लगाकर मुबारकबाद दी। इस मौके पर हाजी मोहम्मद अनीस, फुरकान भाई, मौलाना जहीर अब्बास, हाफिज जावेद, हाफिज मुश्ताक, अबू सलमान और मास्टर इरशाद रब्बानी समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।


