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हिमाचल में भ्रामक खबरों पर नकेल की तैयारी, बनेगी नई रणनीति

शिमला। हिमाचल प्रदेश में इंटरनेट मीडिया (सोशल मीडिया) पर लगातार बढ़ रहे दुष्प्रचार, भ्रामक खबरों और सरकार पर की जा रही तर्कहीन टिप्पणियों पर रोक लगाने के लिए प्रदेश सरकार पूरी तरह हरकत में आ गई है। इस गंभीर मुद्दे पर नकेल कसने के लिए उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री की अध्यक्षता में गठित मंत्रिमंडलीय उप समिति की पहली महत्वपूर्ण बैठक आगामी 30 जून को बुलाई गई है।

सोशल मीडिया प्लेटफार्म्स के लिए मानदंड

इस बैठक का मुख्य उद्देश्य राज्य में संचालित हो रहे विभिन्न वेब पोर्टल्स, फेसबुक न्यूज चैनलों और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्म्स पर पैनी नजर रखना और तथ्यहीन समाचार प्रसारित करने वालों के खिलाफ कड़े कानूनी कदम उठाने के लिए एक मजबूत रणनीति तैयार करना है।

कुछ समय से हिमाचल प्रदेश में बिना किसी पंजीकरण और पत्रकारिता के स्थापित मानदंडों के बिना सैकड़ों की संख्या में फेसबुक पेज और वेब पोर्टल खड़े हो गए हैं।

हाल ही में सामने आए मामले

पिछले साल मानसून में आई भारी आपदा के दौरान कई फेसबुक चैनलों ने पुलों के टूटने और रास्तों के बंद होने की पुरानी या फर्जी वीडियो चलाकर पर्यटकों और स्थानीय लोगों में पैनिक (डर) फैला दिया था। सरकारी भर्तियों, पेंशन योजनाओं और बजट घोषणाओं को लेकर कई अनधिकृत पोर्टल्स ने आधी-अधूरी और गलत जानकारियां प्रसारित कीं, जिससे युवाओं और कर्मचारियों में असंतोष पैदा हुआ।

ये कदम संभावित

राज्य में चल रहे सभी न्यूज पोर्टल्स और फेसबुक आधारित समाचार चैनलों के लिए सरकार के सूचना एवं जन संपर्क विभाग (डीआईपीआर) के पास पंजीकरण अनिवार्य किया जा सकता है। इंटरनेट मीडिया पर 24 घंटे नजर रखने के लिए एक विशेष साइबर विंग या मानिटरिंग सेल का गठन किया जा सकता है, जो भ्रामक पोस्टों को तुरंत फ्लैग करेगा।

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