Mediasamvad24

32.2 C
Noida
Sunday, August 30, 2026

Buy now

spot_img

प्रधानमंत्री की इंडोनेशिया यात्रा आज से, द्विपक्षीय संबंधों को मिलेगी रफ्तार; क्या होगा मुख्य एजेंडा?

नई दिल्ली। पीएम नरेन्द्र मोदी की तीन दिवसीय इंडोनेशिया यात्रा से भारत और इंडोनेशिया के द्विपक्षीय रणनीतिक संबंधों को एक नई दिशा प्रदान करेगी। इस यात्रा के दौरान दोनों देश डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, भुगतान प्रणाली, रक्षा सहयोग को बढ़ा कर अपनी साझेदारी को और गहरा करेंगे।

इस यात्रा के दौरान भारत के यूपीआई और इंडोनेशिया के क्यूरिस (क्यूआरआईएस) के बीच डिजिटल भुगतान लिंकेज का समझौता होगा। इससे बाली और अन्य इंडोनेशियाई पर्यटन स्थल पर जाने वाले लाखों भारतीय पर्यटकों के लिए भुगतान बेहद आसान, तेज और सस्ता हो जाएगा। इंडोनेशिया से कारोबार करने वाले भारतीय व्यवसायियों को भी लाभ होगा।

विदेश मंत्रालय के सूत्र बताते हैं कि इंडोनेशिया धीरे धीरे भारत के कई विकास कार्यक्रमों से प्रेरणा ले रहा है और उनका अनुकरण करना चाहता है। इस बारे में भारत सरकार भी पूरी मदद को तैयार है। इंडोनेशिया का ओपन नेटवर्क (आईओएन) भारत के ओएनडीसी माडल से प्रेरित है।

आईओएन का पहला लाइव ट्रांजेक्शन

7 जुलाई को पीएम मोदी और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांटो के शिखर सम्मेलन के दौरान आईओएन का पहला लाइव ट्रांजेक्शन करने की तैयारी है। यह 6.5 करोड़ से ज्यादा सूक्ष्म, छोटे व मझोले स्तर के उद्यमियों के लिए बहुत ही सहूलियत वाला और कम लागत वाला डिजिटल मार्केटप्लेस तैयार करेगा।

सनद रहे कि भारत की आधार, यूपीआई, डिजिलाकर व ई-केवाइसी से प्रेरिसत हो कर इंडोनेशिया सरकार ने महत्वाकांक्षी डिजिटल नुसंतरा पहल की शुरुआत की है। साथ ही भारतीय कंपनियां इंडोनेशिया की अगली पीढ़ी की डिजिटल फ्रेमवर्क बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। दोनों देश अब सिर्फ माडल साझा करने से आगे बढ़कर संस्थागत सहयोग की ओर बढ़ रहे हैं।

फ्री न्यूट्रिशियस मीट्स प्रोग्राम

स्वास्थ्य और पोषण के क्षेत्र में भी इंडोनेशिया भारत सरकार के कार्यक्रम से मदद ले रहा है। भारत की पीएम पोषण (मिड-डे मील) योजना से प्रेरित हो कर इंडोनेशिया ने भी फ्री न्यूट्रिशियस मीट्स प्रोग्राम लागू किया है। इसी तरह, ग्रामीण क्षेत्रों में सस्ती दवाओं के लिए जन औषधि माडल पर चर्चा हो रही है।इसी तरह से रक्षा क्षेत्र में भी साझेदारी विस्तारित हो रही है।

इंडोनेशिया भारत के साथ डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, सैन्य प्रशिक्षण और समुद्री सहयोग पर काम कर रहा है। आत्मनिर्भर भारत के तहत भारत के स्वदेशी रक्षा उत्पादन के अनुभव से दीर्घकालिक सहयोग के नए अवसर खुल रहे हैं। इसमें ब्रह्मोस मिसाइल जैसी प्रणालियों पर चर्चा हो रही है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, संयुक्त अभ्यास और क्षमता निर्माण पर भी दोनों देशों के बीच लगातार चर्चा चल रही है।

आधुनिक विनिर्माण के लिए आवश्यक धातू

क्रिटिकल मिनरल्स दोनों देशों के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक अवसर प्रस्तुत कर रहे हैं। इंडोनेशिया के पास निकल और अन्य दुर्लभ खनिजों के विश्व के सबसे बड़े भंडार हैं, जो इलेक्ट्रिक वाहनों, बैटरियों और आधुनिक विनिर्माण के लिए आवश्यक हैं। वहां अभी इसका अधिकांश उत्पादन कच्चे रूप में निर्यात हो जाता है और घरेलू स्तर पर मूल्य संवर्धन सीमित रह जाता है।

अन्य संसाधन-समृद्ध देशों की तरह इंडोनेशिया अब इन खनिजों को घरेलू स्तर पर संवर्द्धन करने की योजना लगा रहा है ताकि वैश्विक सप्लाई चेन में बेहतर भूमिका निभा जा सके। इस तरह के खनिजों की आपूर्ति सुनिश्चित करने में जुटे भारत के लिए यहां अवसर बन सकता है।

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

0FansLike
0FollowersFollow
0SubscribersSubscribe
- Advertisement -spot_img

Latest Articles