नई दिल्ली: अवैध घुसपैठ के खिलाफ सख्त संदेश देते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को कहा कि भारत कोई धर्मशाला नहीं है और केंद्र सरकार देश को घुसपैठियों से मुक्त कराने के लिए प्रतिबद्ध है.
उन्होंने चेतावनी दी कि अवैध घुसपैठ राष्ट्रीय सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और देश के जनसांख्यिकीय संतुलन के लिए गंभीर खतरा है. यहां इंटेलिजेंस ब्यूरो के राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति सम्मेलन (NSSC) के समापन सत्र को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि भारत में रहने का अधिकार केवल देश के नागरिकों को है.
उन्होंने कहा, ‘भारत कोई धर्मशाला नहीं है और यहां रहने का अधिकार सिर्फ इस देश के नागरिकों को है.’ उन्होंने घुसपैठ के मामले में सरकार के सख्त रुख पर जोर दिया. शाह ने बताया कि पिछले आठ महीनों में जमीनी सीमा साझा करने वाले सभी राज्यों का दौरा किया गया और सीमा सुरक्षा के लिए चार-सूत्रीय रणनीति वाला एक दस्तावेज राज्य सरकारों के साथ साझा किया गया.
उन्होंने कहा, ‘हमारा लक्ष्य बहुत कम समय में देश को घुसपैठियों से मुक्त करना है.’ गृह मंत्री ने कहा कि घुसपैठ सिर्फ सीमा प्रबंधन का मुद्दा नहीं है, बल्कि इसके देश की सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और जनसांख्यिकीय संरचना पर व्यापक असर पड़ते हैं. उन्होंने अवैध घुसपैठ और आंतरिक सुरक्षा से जुड़ी अन्य उभरती चुनौतियों की पहचान करने और उनसे निपटने के लिए केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत पर जोर दिया.
शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2047 तक एक विकसित भारत बनाने का लक्ष्य रखा है, और इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए मज़बूत आंतरिक सुरक्षा पहली जरूरत है. उन्होंने कहा, ‘अगर भारत को हर क्षेत्र में अग्रणी बनना है, तो उसकी आंतरिक सुरक्षा को और मजबूत करना होगा.’ गृह मंत्री ने कहा कि देश ने आंतरिक सुरक्षा के तीन प्रमुख संवेदनशील क्षेत्रों में बड़ी चुनौतियों पर काबू पा लिया है, और इस उपलब्धि का श्रेय राज्य पुलिस बलों, केंद्रीय एजेंसियों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) को दिया.
शाह ने कहा, ‘अगर पिछली सरकारों ने नशीले पदार्थों, नक्सलवाद और पूर्वोत्तर की समस्याओं के गंभीर होने से पहले ही उन्हें समझा और उनका समाधान किया होता, तो देश को दशकों तक इनसे जूझना नहीं पड़ता. हमने आंतरिक सुरक्षा के तीनों संवेदनशील क्षेत्रों में बड़ी चुनौतियों को खत्म कर दिया है. इसका पूरा श्रेय सभी राज्यों के पुलिस बलों, केंद्रीय एजेंसियों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों को जाता है.’
उन्होंने एनएसएससी से कहा कि वे अगले 15 से 20 सालों के ट्रेंड्स को समझकर आगे की सोचें, चुनौतियों के गंभीर रूप लेने से पहले ही उनकी पहचान करें और उनसे निपटने के लिए रणनीतियां बनाएं. शाह ने ग्लोबल अस्थिरता, ऊर्जा और संसाधनों की असुरक्षा, सप्लाई-चेन में रुकावट, बढ़ती कट्टरपंथ की समस्या और साइबर व गलत जानकारी फैलाने वाले युद्ध से पैदा होने वाले खतरों का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि भविष्य की सुरक्षा नीतियां बनाते समय इन बातों का ध्यान रखना जरूरी है.
इंटेलिजेंस-आधारित पुलिसिंग के महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने बताया कि एक इंटीग्रेटेड डेटा इकोसिस्टम तैयार किया गया है, जो क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम्स (CCTNS), इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (ICJS), नैटग्रिड (NatGrid) और नेशनल ऑटोमेटेड फिंगरप्रिंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (NAFIS) को आपस में जोड़ता है.
उन्होंने कहा, ‘युवा अधिकारियों को डेटा को इंटीग्रेट और एनालाइज करने, अपराधियों के काम करने के तरीके (modus operandi) की पहचान करने और काम की जानकारी (actionable intelligence) हासिल करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करना चाहिए.’
उन्होंने कहा, ‘मोदी सरकार ने भगोड़ों के खिलाफ सिस्टम को मजबूत किया है. 2019 से 2026 के बीच लगभग 274 भगोड़ों को विदेश से वापस लाया गया. सभी राज्यों को इस मकसद के साथ काम करना चाहिए कि विदेश में मौजूद भगोड़ों को भारतीय कानून के दायरे में लाया जा सके.’
शाह ने कहा कि सरकार का तरीका यह है कि खतरों के बड़े संकट में बदलने से पहले ही उनकी पहचान की जाए और शुरुआती दौर में ही उन्हें खत्म कर दिया जाए. शाह ने कहा, ‘ऐसा इकोसिस्टम बनाकर हम एक सुरक्षित, घुसपैठ-मुक्त और नशीले पदार्थों से मुक्त भारत बना पाएंगे.’


