अयोध्या। रमज़ान की रहमतों भरी फिज़ाओं में जहां हर तरफ इबादत और बंदगी का माहौल है, वहीं रुदौली तहसील क्षेत्र के ग्राम पंचायत भेलसर से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने हर दिल को सुकून और खुशी से भर दिया। महज़ 5 साल के मासूम अब्दुल हादी ने रोज़ा रखकर यह साबित कर दिया कि सच्चा जज़्बा उम्र का मोहताज नहीं होता।
भेलसर निवासी मुजाहिद उल इस्लाम के बेटे अब्दुल हादी, जो मदरसा हिदायतुल उलूम में यूकेजी के छात्र हैं, ने पूरे उत्साह और लगन के साथ अपना रोज़ा मुकम्मल किया। छोटी सी उम्र में इतनी बड़ी इबादत को निभाना गांव भर में चर्चा का विषय बन गया है। हर कोई इस नन्हे रोज़ेदार की तारीफ करते नहीं थक रहा।
बेटे की इस कोशिश पर पिता मुजाहिद उल इस्लाम ने भावुक होते हुए कहा, “जब मेरे बेटे ने खुद आकर कहा कि वह रोज़ा रखना चाहता है, तो पहले तो हमें हैरानी हुई, लेकिन उसके जज़्बे ने हमें भी प्रेरित किया। हमने उसे समझाया भी, मगर उसने पूरा दिन बड़े सब्र के साथ रोज़ा रखा। यह हमारे लिए बहुत खुशी और सुकून की बात है। हम अल्लाह का शुक्र अदा करते हैं और दुआ करते हैं कि वह उसे नेक राह पर चलाए।
गांव के लोगों का कहना है कि अब्दुल हादी जैसे बच्चे समाज के लिए एक खूबसूरत मिसाल हैं, जो बचपन से ही अच्छे संस्कार और दीन की तालीम की अहमियत को दिखाते हैं।
यह नन्हा कदम एक बड़ा पैगाम देता है इबादत में ताकत जिस्म से नहीं, बल्कि दिल के इरादों से आती है।


