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28 साल के युवाओं ने रचा इतिहास, Vikram 1 की सफल लॉन्चिंग पर गौतम अदाणी बोले- ‘यही है असली आत्मनिर्भर भारत’

नई दिल्ली: अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी ने शनिवार को स्काईरूट एयरोस्पेस के रॉकेट ‘विक्रम-1’ की सफल ऑर्बिटल लॉन्चिंग पर बधाई देते हुए इसे देश के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर बताया है. उन्होंने कहा कि यह ऐतिहासिक मिशन भारत के निजी अंतरिक्ष उद्योग के लिए एक नए युग की शुरुआत है और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की भावना का सबसे सच्चा और जीता-जागता उदाहरण है.

गौतम अदाणी ने एक्स (X) पर क्या कहा?

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर किए गए अपने एक पोस्ट में गौतम अदाणी ने कहा कि विक्रम-1 की पहली ऑर्बिटल उड़ान का सफल होना और मिशन के सभी उद्देश्यों को हासिल करना भारत के तेजी से उभरते निजी स्पेस इकोसिस्टम के लिए एक अभूतपूर्व उपलब्धि है. उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा, “इतिहास रच दिया गया है. विक्रम-1 ने अपनी पहली ऑर्बिटल उड़ान में मिशन के सभी उद्देश्यों को शानदार तरीके से पूरा किया है. यही ‘आत्मनिर्भर भारत’ का असली प्रमाण है.”

28 साल के युवाओं ने रचा इतिहास

इस मिशन की सबसे बड़ी खासियत का जिक्र करते हुए गौतम अदाणी ने देश की युवा ताकत की जमकर तारीफ की. उन्होंने बताया, “इस मिशन को सफल बनाने वाली टीम की औसत उम्र सिर्फ 28 वर्ष है. यह पूरी दुनिया के लिए इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि आज का युवा भारत क्या कुछ हासिल कर सकता है. जय हिंद!” इसके साथ ही उन्होंने स्काईरूट के सह-संस्थापक पवन चंदना, भारत डैका, उनकी पूरी शानदार टीम और इस मिशन को संभव बनाने वाले इसरो (ISRO) तथा इन-स्पेस (IN-SPACe) के मार्गदर्शकों को भी अपनी ओर से हार्दिक बधाई दी.

भारत बना दुनिया का तीसरा देश

हैदराबाद स्थित निजी स्पेस कंपनी ‘स्काईरूट एयरोस्पेस’ ने ‘मिशन आगमन’ के तहत विक्रम-1 का यह सफल प्रक्षेपण किया है. इस बड़ी कामयाबी के साथ ही भारत अब अमेरिका और चीन के बाद दुनिया का तीसरा ऐसा देश बन गया है, जहां किसी निजी कंपनी ने अंतरिक्ष की कक्षा (ऑर्बिट) में रॉकेट पहुंचाने की क्षमता का सफल प्रदर्शन किया है.

क्या है विक्रम-1 रॉकेट की खासियत?

भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक डॉ. विक्रम साराभाई के नाम पर विकसित यह रॉकेट चार चरणों वाला एक आधुनिक लॉन्च व्हीकल है. करीब सात मंजिला ऊंचे इस रॉकेट को पृथ्वी की निचली कक्षा (लो अर्थ ऑर्बिट) में लगभग 450 किलोमीटर की ऊंचाई तक पहुंचने के लिए भेजा गया है. इसे विशेष रूप से छोटे उपग्रहों (स्मॉल सैटेलाइट्स) को बेहद कम समय और मांग के अनुसार अंतरिक्ष में भेजने के उद्देश्य से तैयार किया गया है. इस लॉन्चिंग से वैश्विक कमर्शियल स्पेस मार्केट में भारत की हिस्सेदारी और ज्यादा मजबूत होगी.

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