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अब 50 करोड़ तक की योजना मंजूर कर सकेंगे मंत्री, लखनऊ के सात प्रवेश द्वार, धर्म-शौर्य के होंगे प्रतीक

राजधानी लखनऊ को आकर्षक, भव्य और विशिष्ट सांस्कृतिक स्वरूप देने के उद्देश्य से शहर के सभी 7 प्रमुख प्रवेश मार्गों पर भव्य प्रवेश द्वार विकसित करने के की योजना है. मुख्यमंत्री ने कहा है कि राजधानी में प्रवेश करते ही उत्तर प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और ऐतिहासिक पहचान स्पष्ट रूप से दिखाई देनी चाहिए.

शुक्रवार को आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि लखनऊ से प्रयागराज, वाराणसी, अयोध्या, नैमिषारण्य, हस्तिनापुर, मथुरा और झांसी की ओर जाने वाले प्रमुख मार्गों पर संबंधित सांस्कृतिक और धार्मिक गंतव्यों की पहचान को दर्शाने वाले प्रवेश द्वार बनाए जाएं. सीएम ने निर्देश दिए कि प्रत्येक मार्ग पर विकसित किया जाने वाला प्रवेश द्वार उस गंतव्य की पौराणिक, ऐतिहासिक और आध्यात्मिक विरासत को प्रतिबिंबित करने वाला होना चाहिए.

किस रोड पर क्या होगा प्रवेश द्वार?

प्रवेश द्वारों के नामकरण और स्वरूप पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रयागराज मार्ग (रायबरेली रोड) पर त्रिवेणी संगम और महाकुंभ परंपरा को दर्शाने वाला संगम द्वार, वाराणसी मार्ग (सुल्तानपुर रोड) पर श्री काशी विश्वनाथ धाम को दर्शाने वाला नंदी द्वार और अयोध्या मार्ग (बाराबंकी रोड) पर भगवान श्रीराम और सूर्यवंश की परंपरा पर आधारित सूर्य द्वार’ होना चाहिए. इसी प्रकार नैमिषारण्य मार्ग (सीतापुर रोड) पर व्यास द्वार, हस्तिनापुर मार्ग (हरदोई रोड) पर धर्म द्वार, मथुरा मार्ग (आगरा रोड) पर कृष्ण द्वार और झांसी मार्ग (उन्नाव रोड) पर वीरता और शौर्य का प्रतीक शौर्य द्वार स्थापित किए जाएं. सीएम योगी ने कहा कि सभी प्रवेश द्वारों पर उत्तर प्रदेश का राजकीय चिन्ह जरूर दर्शाया जाए.

सीएम ने कहा, अर्थपूर्ण बनाया जाएगा प्रवेश द्वार

इन प्रवेश द्वारों के डिजाइन में भारतीय पारंपरिक वास्तुकला, शिल्पकला और सांस्कृतिक प्रतीकों का प्रभावी समावेश किया जाए. पत्थर की नक्काशी, स्तंभ, म्यूरल, फव्वारे, प्रकाश व्यवस्था और हरित परिदृश्य के माध्यम से प्रवेश द्वारों को न केवल सौंदर्यपूर्ण बल्कि अर्थपूर्ण बनाया जाए, जिससे यात्रियों को लखनऊ में प्रवेश करते ही सांस्कृतिक अनुभूति प्राप्त हो.

किस फंड से बनेगा प्रवेश द्वार?

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रवेश द्वारों के निर्माण के लिए कॉर्पोरेट-सोशल रिस्पांसिबिलिटी के फंड का उपयोग किया जाना चाहिए. यह सुनिश्चित करें कि कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप हों और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और अन्य संबंधित एजेंसियों से आवश्यक अनुमतियां प्राप्त कर समन्वय के साथ कार्यवाही की जाए.

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