इस्लामाबाद: भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान की हालत किसी से भी छिपी नहीं है. उसकी आर्थिक हालात जगजाहिर हैं. इसी संबंध में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने देश की बदहाल आर्थिक स्थिति को भी स्वीकारा है. उन्होंने कहा कि दूसरे देशों से कर्ज मांगने जाते हैं तो उनका सिर शर्म से झुक जाता है. शहबाज यह भी माना है कि आईएमएफ और उसके मित्र देशों से फायनेंशियल मदद लेने के लिए हमारे देश को अपनी इज्जत और आत्मसम्मान के साथ-साथ नीतियों से भी समझौता करना पड़ता है
पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में एक कार्यक्रम में देश के जाने-माने एक्सपोर्टर्स और बिजनेस लीडर्स को संबोधित करते हुए, शहबाज शरीफ ने पाकिस्तान की इज्जत पर कर्ज के बोझ पर जोर दिया, और दूसरी इकोनॉमिक नीतियों की जरूरत भी बताई. स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने कहा कि जब फील्ड मार्शल असीम मुनीर और मैं दुनिया भर में घूमकर पैसे मांगते हैं तो हमें शर्म आती है. लोन लेना हमारी सेल्फ-रिस्पेक्ट पर बहुत बड़ा बोझ है. हमारा सिर शर्म से झुक जाता है. हम उन कई चीजो के लिए ना नहीं कह सकते जो वे हमसे करवाना चाहते हैं.
शरीफ का लोन के लिए ‘भीख मांगने’ की बात मानना देश की आर्थिक मुश्किलों और अतंरराष्ट्रीय मदद पर निर्भरता को दिखाता है. यह तब हुआ है जब पाकिस्तान आईएमएफ (IMF) से मदद और कर्ज रोलओवर चाहता है. उन्होंने सऊदी अरब, यूएई (UAE) और कतर के साथ-साथ ‘हर मौसम के दोस्त’ चीन की भी तारीफ की, जिन्होंने हालात चाहे जैसे भी हों, अच्छे और बुरे, दोनों समय में इस्लामाबाद का साथ दिया है.
पाकिस्तान की आर्थिक लाइफलाइन चीन, सऊदी अरब, UAE और कतर पर बहुत ज्यादा निर्भर हैं, जो फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व को स्थिर करने और बैलेंस-ऑफ-पेमेंट संकट को रोकने के लिए जरूरी फाइनेंशियल मदद देते हैं. चीन ने पाकिस्तान को कर्ज चुकाने में मदद करने के लिए अरबों डॉलर सेफ डिपॉजिट में डाले हैं. चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) एक अहम फ्रेमवर्क है, जिसमें एनर्जी और इंफ्रास्ट्रक्चर में $60 बिलियन से ज्यादा का निवेश किया गया है.
सऊदी अरब ने दिसंबर 2024 में स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के साथ $3 बिलियन का डिपॉजिट बढ़ाया और 2025 में लगभग $1.2 बिलियन की डेफर्ड ऑयल पेमेंट सुविधा दी. रियाद ने माइनिंग, खेती और IT में बड़े इन्वेस्टमेंट का वादा किया है, जिसमें कुल $5- $25 बिलियन के पोटेंशियल प्लान हैं.
शहबाज ने देश में बढ़ती गरीबी और बेरोजगारी पर भी चिंता जताई और रिसर्च और डेवलेपमेंट (R&D) और इनोवेशन में विकास की कमी पर दुख भी जताया. वर्तमान में पाकिस्तान एक गंभीर सोशियो-इकोनॉमिक संकट का सामना कर रहा है, जिसमें गरीबी दर बढ़कर लगभग 45 फीसदी आबादी तक पहुंच गई है, जो महंगाई और बाढ़ की वजह से और बढ़ गई है. बेरोजगारी बढ़कर लगभग 7.1 फीसदी हो गई है, जिसमें आठ मिलियन से ज्यादा नागरिक बेरोजगार हैं, जबकि एक्सपोर्ट अभी भी टेक्सटाइल और कमोडिटीज पर बहुत ज्यादा निर्भर है.


