Mediasamvad24

31.1 C
Noida
Saturday, August 29, 2026

Buy now

spot_img

Kidney Safety – दवाइयाँ: रोजमर्रा की ज़रूरत या किडनी के लिए खतरा? आज के समय में दवाइयाँ हमारी लाइफ का लगभग स्थायी हिस्सा बन चुकी हैं

हर घर में कोई न कोई नियमित दवा ले रहा है-कभी दर्द के लिए, कभी एसिडिटी के लिए, कभी शुगर या बीपी के लिए। लेकिन एक बड़ा सवाल है: क्या ये दवाइयाँ हमारी किडनी को नुकसान पहुँचा सकती हैं?

कौन-सी दवाइयाँ किडनी के लिए रिस्की हो सकती हैं, वे नुकसान कैसे करती हैं, और उनसे बचाव कैसे किया जाए।

सबसे बदनाम: पेन किलर
दर्द की दवाइयाँ यानी NSAIDs (जैसे इबुप्रोफेन, डिक्लोफेनाक, पिरॉक्सिकैम) किडनी को नुकसान पहुँचाने के लिए कुख्यात हैं।
ये दवाइयाँ किडनी के ब्लड फ्लो को कम कर देती हैं, जिससे किडनी के फिल्टर पर स्ट्रेस पड़ता है। लंबे समय तक लगातार सेवन करने से Acute Kidney Injury या Chronic Kidney Disease तक हो सकती है।

हर पेनकिलर खतरनाक नहीं होता, लेकिन बिना जरूरत और बिना डॉक्टर की सलाह के लंबे समय तक लेना रिस्की है।

एंटीबायोटिक्स: हर किसी के लिए नहीं
Aminoglycosides (एमिकासिन, जेंटामाइसिन, टोब्रामाइसिन)
ये पावरफुल एंटीबायोटिक्स हैं और गंभीर संक्रमण में जान बचाती हैं। लेकिन ये किडनी के ट्यूब्यूल्स को नुकसान पहुँचा सकती हैं।

किन लोगों में खतरा ज्यादा?
बुजुर्ग
पहले से किडनी मरीज
डायबिटीज पेशेंट
लंबे समय (7–14 दिन से ज्यादा) तक दवा लेना
साथ में पेन किलर या कॉन्ट्रास्ट डाई लेना

बचाव कैसे?

इलाज से पहले बेसलाइन सीरम क्रिएटिनिन टेस्ट
हर 3 दिन में क्रिएटिनिन मॉनिटर
पर्याप्त हाइड्रेशन
यूरिन आउटपुट पर नजर (कम से कम 100 ml/घंटा)
क्रिएटिनिन बढ़ते ही दवा रोक दी जाए तो अक्सर किडनी रिकवर कर सकती है।

कैंसर की कीमोथेरेपी और किडनी
Cisplatin
कई कैंसर में इस्तेमाल होती है। यह किडनी के ट्यूब्यूल्स को सीधे नुकसान पहुँचाती है।
3–5 दिन में क्रिएटिनिन बढ़ना शुरू हो सकता है।

डोज-डिपेंडेंट टॉक्सिसिटी – जितनी ज्यादा मात्रा, उतना ज्यादा खतरा।

Methotrexate (High Dose)
यह भी ट्यूब्यूल डैमेज कर सकती है।
इसमें एक अतिरिक्त सावधानी है:

यूरिन को अल्कलाइन रखना (pH > 7)
जरूरत पड़े तो Leucovorin एंटीडोट दिया जा सकता है
नियमित ब्लड टेस्ट यहाँ भी अनिवार्य है।

एसिडिटी की दवाइयाँ भी सुरक्षित नहीं हमेशा
Proton Pump Inhibitors (ओमेप्राजोल, पैंटोप्राजोल, रेबिप्राजोल)

ये दवाइयाँ आमतौर पर सुरक्षित मानी जाती हैं, लेकिन लंबे समय तक लेने पर:

Acute Kidney Injury
Chronic Kidney Disease
Acute Interstitial Nephritis
जैसी समस्याएँ हो सकती हैं।

क्या करें?
जरूरत होने पर ही लें

6 हफ्ते से ज्यादा लगातार उपयोग से बचें
बीच में ब्रेक दें
लाइफस्टाइल सुधारें: मसाले कम, हाइड्रेशन अच्छा, वजन नियंत्रण
और समय-समय पर क्रिएटिनिन टेस्ट कराएँ।

दोधारी तलवार वाली दवाइयाँ
1. ACE Inhibitors / ARBs / SGLT2 Inhibitors
(जैसे रैमिप्रिल, लोसार्टन, एम्पाग्लिफ्लोजिन)

ये किडनी को लंबे समय में बचाती हैं क्योंकि ये फिल्टर पर दबाव कम करती हैं और प्रोटीन लीकेज रोकती हैं।

लेकिन:

अगर क्रिएटिनिन 30% से ज्यादा बढ़े
पोटेशियम 5 mg/dL से ऊपर जाए
तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क जरूरी है।

शुरुआती 10–30% बढ़ोतरी कई बार सामान्य और फायदेमंद हो सकती है।
5 दिन बाद टेस्ट जरूर कराएँ।

2. Diuretics (फ्यूरोसेमाइड, हाइड्रोक्लोरोथायजाइड, स्पायरोनोलैक्टोन)
ये शरीर से अतिरिक्त पानी निकालती हैं।
फायदा: बीपी कंट्रोल, सूजन कम
नुकसान: डिहाइड्रेशन, सोडियम/पोटेशियम असंतुलन

अगर:

चक्कर आ रहे हों
जीभ सूख रही हो
बहुत कमजोरी लगे
तो डोज एडजस्ट करनी पड़ सकती है।

एक घातक कॉम्बिनेशन याद रखें:
ACE Inhibitor + NSAID + Diuretic
यह किडनी को अचानक खराब कर सकता है।

हर्बल दवाइयाँ: हमेशा सुरक्षित नहीं
यह मान लेना कि हर्बल मतलब हमेशा सुरक्षित-गलत है।

समस्या कहाँ है?
Heavy Metals (Lead, Cadmium, Arsenic)
अगर दवा GMP certified और लेबल्ड नहीं है, तो मिलावट हो सकती है।

मिलावट
कुछ तथाकथित हर्बल दवाओं में छिपे हुए स्टेरॉयड, पेन किलर या डाययूरेटिक मिलाए जाते हैं।

Aristolochic Acid
यह इंटरस्टिशियल नेफ्राइटिस और यूरोथेलियल कैंसर तक कर सकता है।

High Oxalate Juices
जैसे ज्यादा पालक या स्टार फ्रूट जूस—किडनी स्टोन और रुकावट पैदा कर सकते हैं।

बचाव
सिर्फ GMP certified, branded, labeled दवा लें

अनलेबल्ड खुली दवाइयाँ न लें
कोई “चमत्कारी इलाज” पर भरोसा न करें
मॉनिटरिंग: सबसे बड़ा हथियार
कोई भी नई दवा शुरू की?

1 हफ्ते बाद क्रिएटिनिन
1 महीने बाद दोबारा
फिर हर 3 महीने
यह नियम एलोपैथिक और आयुर्वेदिक-दोनों पर लागू है।

Conclusion: दवा जरूरी है, लेकिन समझदारी उससे ज्यादा जरूरी
दवाइयाँ दुश्मन नहीं हैं। सही दवा, सही मरीज, सही डोज और सही मॉनिटरिंग-ये चार बातें किडनी को सुरक्षित रखती हैं।

बिना डॉक्टर की सलाह के दवा लेना, लंबे समय तक खुद से जारी रखना, या टेस्ट न कराना-यही असली खतरा है।

अगर आप दवा ले रहे हैं तो उसका फायदा मिलता रहे, लेकिन किडनी सुरक्षित रहे-इसके लिए जागरूक रहना आपकी जिम्मेदारी है।

Health is wealth

मीना अग्रवाल
आगरा

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

0FansLike
0FollowersFollow
0SubscribersSubscribe
- Advertisement -spot_img

Latest Articles