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परिवर्तन केवल एक थीम न रहे, इसे एक वैश्विक आंदोलन बनने दें’: श्री भूपेंद्र यादव ने टेरी के विश्व सतत विकास शिखर सम्मेलन के 25वें संस्करण का उद्घाटन किया

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने 25वें विश्व सतत विकास शिखर सम्मेलन का उद्घाटन किया; टेराज़ोन में ‘हिम-कनेक्ट’ और WSDS आर्काइवल पॉकेटबुक का विमोचन।

नई दिल्ली | 25 फरवरी, 2026: द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (टेरी) के वार्षिक प्रमुख मंच, विश्व सतत विकास शिखर सम्मेलन (WSDS) 2026 के रजत जयंती संस्करण का आज ताज पैलेस में शुभारंभ हुआ। यह आयोजन जलवायु और विकास से जुड़े परिवर्तनकारी कार्यों के एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए दुनिया भर के नेताओं, नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत के दिग्गजों, शोधकर्ताओं और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों को एक साथ लाता है।

“परिवर्तन | ट्रांसफॉर्मेशन्स: सतत विकास के लिए दृष्टि, स्वर और मूल्य” की व्यापक थीम के अंतर्गत आयोजित WSDS (WSDS) का यह 25वां संस्करण, शिखर सम्मेलन की विरासत में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। यह ‘ग्लोबल साउथ’ (वैश्विक दक्षिण) में आधारित सतत विकास पर स्वतंत्र रूप से आयोजित होने वाला दुनिया का एकमात्र अंतरराष्ट्रीय मंच है।

स्वागत संबोधन देते हुए टेरी के अध्यक्ष, श्री नितिन देसाई ने कहा, “आज दुनिया पूरी तरह बदल चुकी है। हमारे सामने चुनौती जागरूकता की नहीं, बल्कि कार्रवाई की है। विश्व सतत विकास शिखर सम्मेलन का पूरा सफर सिर्फ जागरूकता की बातें करने से हटकर अब इस बात की बेहतर समझ की ओर बढ़ा है कि स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए वास्तव में क्या किया जाना चाहिए। हमारे सामने सबसे गंभीर समस्या जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन की है।”

टेरी की महानिदेशक, डॉ. विभा धवन ने अपने थीम संबोधन में इस बात पर जोर दिया, “पिछले 25 संस्करणों के दौरान, WSDS वैश्विक दक्षिण के लिए जलवायु परिवर्तन और सतत विकास पर विमर्श को दिशा देने वाला एकमात्र स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय मंच बन गया है। हम चर्चाएं तो बहुत कर चुके हैं, लेकिन आज हमें भारत और वैश्विक, दोनों स्तरों पर ठोस कार्रवाई की जरूरत है।”

सत्र के समापन से पहले, डॉ. धवन ने भारत के माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा साझा किया गया एक विशेष संदेश पढ़कर सुनाया। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा:

“हमारा दृष्टिकोण ‘अंत्योदय’ से प्रेरित है, जिसका अर्थ है सबसे वंचित व्यक्ति का उत्थान। जलवायु कार्रवाई को सबसे पहले कमजोर, गरीब और वंचित वर्ग की रक्षा करनी चाहिए। ग्लोबल साउथ जलवायु परिवर्तन का असमान रूप से बहुत अधिक भार वहन करता है, फिर भी उनके लिए विकास अनिवार्य है। इसलिए ‘जलवायु न्याय’ अत्यंत आवश्यक है। विकासशील देशों को पृथ्वी की रक्षा करते हुए गरीबी और भूख का उन्मूलन करना होगा, जिसके लिए प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, वित्तीय विकल्प और साझेदारियां बहुत जरूरी हैं।

विकसित देशों की यह विशेष जिम्मेदारी है कि वे तेजी से आगे बढ़ें, सतत जीवनशैली अपनाएं और बड़े पैमाने पर वित्त व तकनीक उपलब्ध कराएं। मुझे उम्मीद है कि यह सम्मेलन संकल्पों को मजबूत करेगा, सहयोग को गहरा करेगा और हमारे ग्रह के लिए एक सतत भविष्य सुनिश्चित करेगा। WSDS के रजत जयंती संस्करण में सार्थक विचार-विमर्श के लिए मेरी ढेरों शुभकामनाएं।”

विशेष संबोधन में, टाटा ट्रस्ट्स के सीईओ, श्री सिद्धार्थ शर्मा ने जोर देते हुए कहा, “यह कार्रवाई का समय है। यह बेहद महत्वपूर्ण है कि हम जलवायु परिवर्तन की भाषा का लोकतंत्रीकरण करें। इसे केवल सम्मेलनों, बैठक कक्षों या बोर्डरूम की चर्चाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे आम जनमानस तक पहुँचना होगा। लोगों को यह समझना होगा कि यह उन पर कैसे प्रभाव डालता है। इसके बाद हमें ऐसे समाधानों पर काम करना होगा जो स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल हों, और जिनमें अनुकूलन को भी उतना ही महत्व दिया जाए जितना हम शमन को देते हैं।”

मंत्रालयी उद्घाटन: विजन-आधारित जलवायु नेतृत्व का आह्वान

इस शिखर सम्मेलन का औपचारिक उद्घाटन भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री, माननीय श्री भूपेंद्र यादव द्वारा किया गया। अपने मुख्य संबोधन में, मंत्री ने समानता, लचीलापन और सतत विकास पर टिकी जलवायु महत्वाकांक्षा के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया।

WSDS (WSDS) के ग्लोबल साउथ से उभरकर एक ऐसे विशिष्ट मंच बनने पर, जो सरकारों, उद्योग जगत, शिक्षाविदों, नागरिक समाज और समुदायों को एक साथ लाता है ताकि ‘स्थिरता के विज्ञान’ को नीतियों, साझेदारियों और धरातल पर व्यावहारिक कार्रवाई में बदला जा सके, श्री यादव ने कहा, “आज का दिन केवल एक विरासत का उत्सव नहीं है, बल्कि यह मानवता और इस ग्रह के लिए एक निर्णायक क्षण है। इस शिखर सम्मेलन की मुख्य थीम — ट्रांसफॉर्मेशन्स: विजन, वॉयस और वैल्यूज फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट — एक रणनीतिक जरूरत है। लेकिन नेतृत्व के लिए धैर्य और दृष्टि दोनों की आवश्यकता होती है। शिखर सम्मेलन में रेखांकित ‘परिवर्तन का सिद्धांत’ — कंस्ट्रक्टिविज़्म, लर्निंग, ट्रांसफॉर्मेशन — हमें याद दिलाता है कि मानक और नियम संवाद के माध्यम से विकसित होते हैं।

लेकिन अगले 25 वर्ष केवल क्रियान्वयन के होने चाहिए। हमें आगे बढ़ना होगा: प्रतिज्ञाओं से प्रदर्शन की ओर; लक्ष्यों से प्रगति-पथ की ओर; और महत्वाकांक्षा से जवाबदेही की ओर। इस सम्मेलन को उस आयोजन के रूप में याद किया जाए जहाँ: विजन व्यावहारिक बना, आवाजें समावेशी हुईं और मूल्य संस्थागत बने। ‘परिवर्तन’ केवल एक विषय बनकर न रह जाए, बल्कि इसे एक वैश्विक आंदोलन बनने दें।”

उद्घाटन संबोधन में, कोऑपरेटिव रिपब्लिक ऑफ गुयाना के उपराष्ट्रपति, महामहिम डॉ. भर्रत जगदेव ने कहा, “जब यह शिखर सम्मेलन पच्चीस साल पहले शुरू हुआ था, तब सारा ध्यान जलवायु और स्थिरता से जुड़े मुद्दों पर जागरूकता बढ़ाने पर था। आज चुनौती जागरूकता की नहीं, बल्कि अपने लक्ष्यों को पाने के लिए ठोस कार्रवाई और उच्च महत्वाकांक्षा की है। ऐसे समय में जब बड़ी अर्थव्यवस्थाएं पीछे हट रही हैं, जलवायु लक्ष्यों को हासिल करना—विशेष रूप से कार्बन मूल्य निर्धारण, बहुपक्षीय व्यवस्थाओं और विमानन व नौवहन जैसे क्षेत्रों में—कहीं अधिक कठिन हो जाता है।

इसके बावजूद, मजबूत राष्ट्रीय नेतृत्व प्रगति को आगे बढ़ा सकता है। गुयाना में, हमारी 2009 की लो-कार्बन डेवलपमेंट स्ट्रैटेजी ने यह साबित किया है कि मौजूदा वनों को बचाए रखना उच्च गुणवत्ता वाला और किफायती समाधान प्रदान करता है। हमने तेल संसाधनों का जिम्मेदारी से विकास करने के साथ-साथ, स्वैच्छिक और अनुपालन बाजारों में करोड़ों डॉलर मूल्य के ‘फॉरेस्ट कार्बन क्रेडिट’ बेचे हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि सस्टेनेबिलिटी वास्तविक आर्थिक मूल्य प्रदान करती है।”

हिम-कनेक्ट और WSDS रजत जयंती आर्काइवल पॉकेटबुक का विमोचन

उद्घाटन दिवस का एक मुख्य आकर्षण ‘हिम-कनेक्ट’ का शुभारंभ था। यह ‘हिमालय से और हिमालय के लिए’ केंद्रित एक नवाचार मेला है, जो पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की एक अनूठी पहल है। यह मंच ‘राष्ट्रीय हिमालय अध्ययन मिशन’ के तहत विकसित तकनीकों को स्टार्टअप्स, उद्यमियों और निवेशकों से जोड़ता है, ताकि हिमालयी क्षेत्र के सतत विकास को गति दी जा सके। यह पहल नाजुक पर्वतीय पारिस्थितिक तंत्र की सुरक्षा के साथ-साथ भारतीय हिमालयी क्षेत्र में ‘हरित आजीविका’ और नवाचार-आधारित विकास को बढ़ावा देने की दिशा में एक मजबूत नीतिगत कदम है।

टेरी ने WSDS की रजत जयंती के अवसर पर एक विशेष स्मारक प्रकाशन का विमोचन किया, जिसका शीर्षक है: “विश्व सतत विकास शिखर सम्मेलन (2001–2026): सतत विकास पर महत्वाकांक्षा और कार्रवाई को आगे बढ़ाने के 25 संस्करण – एक आर्काइवल पॉकेटबुक।” यह प्रकाशन WSDS के माध्यम से आकार लेने वाले 25 वर्षों के वैश्विक संवाद, नेतृत्व और साझेदारियों का वृत्तांत प्रस्तुत करता है। इसमें दुनिया भर के राष्ट्राध्यक्षों, मंत्रियों, नोबेल पुरस्कार विजेताओं, व्यावसायिक दिग्गजों और परिवर्तनकर्ताओं को एक साथ लाने की इस मंच की यात्रा का दस्तावेजीकरण किया गया है।

रजत जयंती ‘आर्काइवल पॉकेटबुक’ के बारे में बताते हुए डॉ. शैली केडिया, क्यूरेटर, विश्व सतत विकास शिखर सम्मेलन, ने कहा, “यह आर्काइवल पुस्तक हमारी सामूहिक यात्रा के 25 संस्करणों का दस्तावेज़ है। यह शिखर सम्मेलन के सफर को ‘एजेंडा तय करने’ से लेकर ‘समाधान-उन्मुख जुड़ाव’ की ओर विकसित होते हुए दर्शाती है। साथ ही, यह उन मुख्य घोषणाओं, प्रमुख पहलों और ऐतिहासिक पड़ावों को समेटती है, जिन्होंने वैश्विक स्थिरता से जुड़ी चर्चाओं को नया आकार दिया है।”

केंद्रित विषयगत चर्चाएं

दिन की शुरुआत में, WSDS 2026 के अंतर्गत गहन विषयगत सत्रों की एक श्रृंखला आयोजित की गई। इनमें भारत और ‘ग्लोबल साउथ’ की प्रमुख प्राथमिकताओं पर चर्चा की गई, जिनमें जलवायु वित्त, स्वच्छ ऊर्जा, प्रदूषण नियंत्रण, संसाधन सुरक्षा और वैश्विक शासन जैसे विषय शामिल थे। इन चर्चाओं से प्राप्त सुझावों को अगले दो दिनों में होने वाले मुख्य पूर्ण सत्रों में शामिल किया जाएगा, जिससे अमल में लाई जा सकने वाली साझेदारियों और नीतिगत सिफारिशों को बल मिलेगा।

आभार प्रस्ताव टेरी के वरिष्ठ निदेशक, श्री संजय सेठ द्वारा प्रस्तुत किया गया। उन्होंने विशिष्ट अतिथियों के प्रति अपनी हार्दिक कृतज्ञता व्यक्त की और अंतरराष्ट्रीय भागीदारों, भारत सरकार के मंत्रालयों, राज्य सरकारों, कॉर्पोरेट पार्टनर्स, शैक्षणिक संस्थानों, थिंक-टैंक्स और नागरिक समाज संगठनों के सहयोग को सराहा। उन्होंने कहा, “हमारे भागीदारों के सामूहिक प्रयास ही WSDS को गहराई, विश्वसनीयता और प्रभाव प्रदान करते हैं। इस शिखर सम्मेलन और इसके परिणामों को आकार देने में उनके निरंतर सहयोग के लिए हम उनके हृदय से आभारी हैं।”

ग्लोबल साउथ के लिए रजत जयंती का ऐतिहासिक क्षण

पिछले 25 वर्षों में, WSDS सतत विकास पर ‘दक्षिणी दृष्टिकोण’ को मजबूती से रखने वाला एक प्रमुख वैश्विक मंच बन गया है। आज जब विश्व जलवायु, जैव विविधता, वित्त और समानता जैसे एक-दूसरे से जुड़े संकटों का सामना कर रहा है, 2026 का यह रजत जयंती संस्करण केवल छोटे-मोटे सुधारों तक सीमित न रहकर, व्यापक प्रणालीगत परिवर्तन की दिशा में कदम बढ़ाने का प्रयास कर रहा है।

उद्घाटन सत्र ने आगामी दिनों की दिशा तय कर दी है और यह स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी परिवर्तनकारी बदलाव के लिए दीर्घकालिक विजन, विविध आवाजों और मूल्यों पर आधारित नेतृत्व अनिवार्य है।

WSDS 2026 का आयोजन 27 फरवरी 2026 तक जारी रहेगा। इसमें उच्च-स्तरीय पूर्ण सत्र, वैश्विक नेताओं के संबोधन और क्षेत्र-विशिष्ट गहन चर्चाएं होंगी, जिनका उद्देश्य एक न्यायसंगत, लचीले और सतत भविष्य के लिए ठोस कार्रवाई को गति देना है।

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