गाजियाबाद :- पंजाब नेशनल बैंक का ऋण न चुकाने पर डासना गेट, गाजियाबाद स्थित राम चंद ज्वैलर्स की बंधक दो दुकानों पर कब्जा दिलाने गई महिला अधिवक्ता के साथ कथित दुर्व्यवहार का मामला सामने आया है। इस संबंध में बैंक के ऋण बकायेदार राम चंद ज्वैलर्स के पूरे परिवार के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।
महिला अधिवक्ता प्रियंका शर्मा ने पुलिस को दी गई तहरीर में बताया कि वह पंजाब नेशनल बैंक सहित कई बैंकों में प्रतिभूति हित प्रवर्तन एवं पुनर्निर्माण अधिनियम, 2002 के तहत विधिक कार्य करती हैं। बैंक द्वारा उनकी कंपनी को ऋण बकायेदार राम चंद ज्वैलर्स की संपत्ति पर विधिवत कब्जा दिलाने के लिए अधिकृत किया गया था। माननीय उप जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) न्यायालय के आदेश के अनुपालन हेतु नायब तहसीलदार सदर गाजियाबाद को कब्जा कराने के लिए नियुक्त किया गया था।
तहरीर के अनुसार, 10 फरवरी को लगभग 3 बजे प्रियंका शर्मा, नायब तहसीलदार, बैंक अधिकारी और पुलिस बल के साथ बंधक संपत्ति पर कब्जे की कार्रवाई के लिए पहुंचीं। मौके पर वैभव गोयल, रविंद्र गोयल, दीपक गोयल, सोनू उर्फ पायलट, आयुष गर्ग सहित परिवार की तीन महिलाएं और 10–15 अन्य लोग पहले से मौजूद थे। आरोप है कि इन लोगों ने कब्जा टीम को घेरकर नारेबाजी की, आत्महत्या की धमकी दी और कार्रवाई में बाधा डालने का प्रयास किया।
प्रियंका शर्मा का आरोप है कि सोनू उर्फ पायलट ने उनके साथ और टीम के अन्य सदस्यों के साथ सार्वजनिक रूप से अभद्रता व धक्का-मुक्की की, अपशब्द कहे तथा जान से मारने और भविष्य में बुरा अंजाम भुगतने की धमकी दी। स्थिति तनावपूर्ण होने पर 112 पर कॉल की गई। अतिरिक्त पुलिस बल के मौके पर पहुंचने के बाद टीम किसी तरह सुरक्षित बाहर निकल सकी।
प्रियंका शर्मा ने बताया कि उनकी तहरीर पर पुलिस ने राम चंद ज्वैलर्स परिवार के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। उन्होंने गाजियाबाद पुलिस का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वह इस अधिनियम के तहत 100 से अधिक संपत्तियों पर कब्जा दिला चुकी हैं और अधिकांश मामलों में ऋण बकायेदार प्रशासन को गुमराह करने का प्रयास करते हैं, किंतु अंततः न्यायालय के आदेश का पालन होता है।
उन्होंने यह भी बताया कि संबंधित खाता पिछले 10 वर्षों से अनियमित चल रहा है और लगभग 9 करोड़ रुपये का ऋण बकाया है। उनके अनुसार, रविंद्र गोयल और उसके परिवार द्वारा योजनाबद्ध तरीके से बैंक की राशि हड़पने की कोशिश की जा रही थी, किंतु ऋण वसूली अधिकरण, लखनऊ ने उनकी दलीलों को निराधार मानते हुए बैंक के पक्ष में आदेश पारित कर दिया है।
अधिवक्ता ने स्पष्ट किया कि बैंक का उद्देश्य किसी की संपत्ति बेचना नहीं होता, बल्कि वर्षों से बकाया सार्वजनिक धन की नियमानुसार वसूली करना होता है। पुलिस द्वारा मामले की जांच की जा रही है।


