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शबे कद्र की मुकद्दस रात में इबादत से जगमगाईं मस्जिदें, सजदों और दुआओं में डूबा रूदौली

भेलसर जामा मस्जिद में देर रात सामूहिक दुआ, उलेमा ने शबे कद्र की फजीलत और नमाज के सही तरीके पर दी नसीहत

मोहम्मद आलम

अयोध्या। मुकद्दस माह रमजान के आखिरी अशरे की दूसरी शबे कद्र की रात गुरुवार को रूदौली तहसील क्षेत्र में अकीदत, इबादत और रूहानियत का अनोखा नजारा देखने को मिला। रात होते ही मस्जिदों में नमाज, कुरान-ए-पाक की तिलावत और जिक्र-ओ-अजकार का सिलसिला शुरू हो गया। अकीदतमंदों ने पूरी रात जागकर इबादत की और अल्लाह की बारगाह में अपने गुनाहों की माफी, रहमत, बरकत और मगफिरत की दुआ मांगी।
क्षेत्र की विभिन्न मस्जिदों में बड़ी संख्या में रोजेदारों ने शबे कद्र की बरकतें हासिल करने के लिए इबादत की। भेलसर गांव की जामा मस्जिद, सैयदना बिलाल मस्जिद भेलसर चौराहा समेत आसपास की मस्जिदों में रातभर नमाज और तिलावत का सिलसिला जारी रहा। मस्जिदों में बुजुर्गों के साथ-साथ नौजवान और नन्हे-मुन्ने बच्चे भी बड़ी तादाद में इबादत में शामिल हुए, जिससे माहौल पूरी तरह रूहानी नजर आया।
देर रात करीब तीन बजे भेलसर की जामा मस्जिद में अकीदतमंदों की बड़ी भीड़ जुटी, जहां कारी रियाज की अगुवाई में सामूहिक दुआ कराई गई। इस दौरान लोगों ने हाथ उठाकर अल्लाह से रहमत, बरकत और पूरी उम्मत की सलामती की दुआ मांगी।
इबादत के इस मौके पर कारी रियाज, मौलाना सऊद, हाफिज अनस और हाफिज अबू हमजा ने अकीदतमंदों को दो-दो रकअत नफ्ल नमाज अदा कराई। नमाज के बाद कारी रियाज ने सामूहिक दुआ कराते हुए मुल्क में अमन-चैन, आपसी भाईचारे और इंसानियत की भलाई के लिए खास दुआ की।
मौलाना मुजाहिद उल इस्लाम नदवी ने अपने बयान में शबे कद्र की फजीलत बयान करते हुए कहा कि यह रात अल्लाह की खास रहमतों वाली रात होती है। उन्होंने कहा कि इस रात में बंदे को ज्यादा से ज्यादा तौबा, इस्तगफार और दुआ में मशगूल रहना चाहिए, क्योंकि सच्चे दिल से की गई दुआ अल्लाह की बारगाह में कबूल होती है।
इसी दौरान मौलाना समीम ने अकीदतमंदों को नमाज अदा करने का सही तरीका और मस्जिद के आदाब के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि नमाज इस्लाम का अहम स्तंभ है और हर मुसलमान को इसे पूरी पाबंदी और खशू-खुजू के साथ अदा करना चाहिए। उन्होंने लोगों को दीन-ए-इस्लाम की बुनियादी बातों पर अमल करने और अपने किरदार को बेहतर बनाने की नसीहत दी।
वहीं मौलाना आरिफ बसीर नदवी ने रमजान के मुकद्दस महीने की अहमियत पर रोशनी डालते हुए कहा कि यह महीना इंसान को सब्र, इबादत और नेकियों की राह पर चलने की तालीम देता है। उन्होंने कहा कि रमजान में की गई इबादत और नेक अमल का सवाब कई गुना बढ़ जाता है, इसलिए हर मुसलमान को इस मुबारक महीने की बरकतों का भरपूर फायदा उठाना चाहिए।
शबे कद्र के मौके पर कई मस्जिदों में इबादत करने आए रोजेदारों के लिए सहरी और खाने-पीने का भी इंतजाम किया गया था, ताकि पूरी रात इबादत करने वाले लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो। स्थानीय लोगों ने बढ़-चढ़कर इस व्यवस्था में सहयोग किया, जिससे मस्जिदों का माहौल इबादत और भाईचारे की मिसाल बन गया।

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