नई दिल्ली: कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने मंगलवार को लोकसभा में बोलते हुए शिक्षा में सुधार के लिए केंद्र सरकार द्वारा गठित हाई-पावर्ड टास्क फोर्स पर तंज कसा. उन्होंने कहा कि सिर्फ नई-नई कमेटियां बनाने से काम नहीं चलेगा. राधाकृष्णन कमेटी की आज तक एक भी सिफारिश लागू नहीं हुई है, वहीं नई कमेटी में एक पूर्व IB चीफ, एक आईटी कंपनी के मालिक और एक गौ-मूत्र विशेषज्ञ भी हैं.
गौ-मूत्र विशेषज्ञ को लेकर माना जा रहा है कि प्रियंका गांधी का इशारा आईआईटी मद्रास के डायरेक्टर वी. कामाकोटी की ओर था, जो इंफोसिस के को-फाउंडर नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाले हाई-पावर्ड टास्क फोर्स में शामिल हैं.
प्रियंका गांधी की इस टिप्पणी से कामाकोटी फिर से चर्चा में आ गए हैं. दरअसल, 2025 में कामाकोटी ने दावा किया था कि गोमूत्र में एंटीबैक्टीरियल और पाचन गुण होते हैं. उनके इस दावे की वैज्ञानिकों और विरोधी नेताओं ने कड़ी आलोचना की थी.
जानिए कौन हैं वी कामाकोटि
प्रोफेसर वीझिनाथन कामाकोटि (V. Kamakoti) आईआईटी मद्रास से कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग में MS और PhD हैं. वह 2001 में फैकल्टी में शामिल हुए और जनवरी 2022 से आईआईटी मद्रास के डायरेक्टर का पद संभाल रहे हैं.
वह कंप्यूटर आर्किटेक्चर, इन्फॉर्मेशन सिक्योरिटी और VLSI डिजाइन में विशेषज्ञ हैं, जो लाखों छोटे इलेक्ट्रॉनिक स्विच, जिन्हें ट्रांजिस्टर कहते हैं, को एक सिलिकॉन चिप पर पैक करने का प्रोसेस है. वह आईआईटी मद्रास के माइक्रोप्रोसेसर डेवलपमेंट प्रोग्राम और इसके इन्फॉर्मेशन सिक्योरिटी एजुकेशन और अवेयरनेस प्रोग्राम के प्रमुख भी हैं.
प्रोफेसर वी कामाकोटि ने भारत के पहले स्वदेशी इंडस्ट्रियल ग्रेड माइक्रोप्रोसेसर SHAKTI को विकसित करने वाली टीम को लीड किया. यह एक घरेलू चिप है जिसका उद्देश्य डिफेंस और कम्युनिकेशन जैसे क्षेत्र में आयातित प्रोसेसर पर देश की निर्भरता कम करना है.
प्रोफेसर कामकोटि नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजरी बोर्ड के सदस्य हैं. इससे पहले, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा बनाए गए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टास्क फोर्स के चेयरमैन थे. वह भारतीय रिजर्व बैंक और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) की टेक्नोलॉजी कमेटियों में भी हैं.
वह IIT मद्रास में, JEE के चेयरमैन और इंडस्ट्रियल कंसल्टेंसी और स्पॉन्सर्ड रिसर्च के एसोसिएट डीन भी रह चुके हैं. उन्हें 2026 में पद्म श्री पुरस्कार से नवाजा गया है.


