मुंबई: देश के सबसे बड़े औद्योगिक घराने टाटा समूह से एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है. टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. 18 अगस्त को होने वाली टाटा संस की सालाना आम बैठक (AGM) से ठीक पहले आई इस खबर ने कॉर्पोरेट जगत के साथ-साथ वित्तीय बाजारों को भी हिलाकर रख दिया है.
क्यों दिया चंद्रशेखरन ने इस्तीफा?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, चंद्रशेखरन का मौजूदा कार्यकाल फरवरी 2027 में समाप्त होने वाला था. चेयरमैन पद पर बने रहने के लिए आगामी 18 अगस्त की एजीएम में उन्हें बतौर डायरेक्टर (निदेशक) दोबारा चुना जाना जरूरी था. हालांकि, कंपनी बोर्ड में उनकी पुनर्नियुक्ति के प्रस्ताव को सभी सदस्यों का एकमत समर्थन नहीं मिला. सूत्रों के अनुसार, चंद्रशेखरन किसी भी तरह के विवादित शेयरधारक मतदान का सामना नहीं करना चाहते थे, इसलिए उन्होंने खुद ही पद छोड़ने का फैसला किया.
इस बड़े फैसले के पीछे टाटा समूह के भीतर चल रहे वैचारिक मतभेदों को मुख्य कारण माना जा रहा है. रिपोर्ट्स के अनुसार, टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा और एन. चंद्रशेखरन के बीच कुछ नए बिजनेस प्रोजेक्ट्स के प्रदर्शन और रणनीतियों को लेकर असहमति थी. इसी वजह से बीते फरवरी महीने में बोर्ड ने चंद्रशेखरन के कार्यकाल विस्तार पर फैसला टाल दिया था.
शेयर बाजार में मची खलबली, टाटा के शेयर गिरेनेतृत्व संकट की इस खबर का सीधा असर शेयर बाजार पर देखने को मिला. बुधवार सुबह के कारोबार में टाटा ग्रुप की प्रमुख कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली देखी गई और वे 1 फीसदी तक टूट गए:
TCS: कंपनी के शेयर करीब 1% गिरकर ₹2,424.50 पर आ गए.
टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर इसमें 1% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई.
टाइटन और टाटा पावर: दोनों कंपनियों के शेयरों में क्रमशः 1.03% और 0.9% की कमजोरी देखी गई.
टाटा ग्रुप के साथ 4 दशक का सफर
एन. चंद्रशेखरन का टाटा ग्रुप के साथ करीब 39 साल पुराना नाता रहा है. उन्होंने 1987 में एक सॉफ्टवेयर प्रोग्रामर के रूप में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) से अपने करियर की शुरुआत की थी. अपनी काबिलियत के दम पर वे पहले टीसीएस के सीईओ बने और फिर साल 2017 में उन्हें टाटा संस का चेयरमैन नियुक्त किया गया. वे टाटा समूह के इतिहास में पहले गैर-पारसी चेयरमैन थे. अब उनके इस्तीफे के बाद बोर्ड के सामने टाटा साम्राज्य के लिए एक नए उत्तराधिकारी को तलाशने की बड़ी चुनौती है.


