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Saturday, August 29, 2026

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कानून व्यवस्था पर सीएम धामी सख्त; कहा-कार्यशैली सुधारे पुलिस, आम आदमी को सताया न जाए

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कानून व्यवस्था को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि उत्तराखंड में कानून व्यवस्था से किसी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि पुलिस-प्रशासन का प्रत्येक विभाग आम जनता के प्रति संवेदनशील व उत्तरदायी होकर कार्य करे। आम आदमी के साथ संवेदनशीलता और सम्मानजनक व्यवहार किया जाए। निर्दोषों को परेशान करने के मामलों को गंभीरता से लिया जाएगा।

सचिवालय में आयोजित समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कानून व्यवस्था की गहन समीक्षा की। उन्होंने कहा कि थाना-चौकियों में वर्क कल्चर सुधारा जाए। अपराध नियंत्रण को लेकर सीएम ने कहा कि केवल कार्रवाई पर्याप्त नहीं, बल्कि आत्ममंथन भी जरूरी है।

इसके लिए पुलिस व प्रशासन के सभी विभाग प्रभावी समन्वय स्थापित करें। निर्देश दिए कि आपराधिक मामलों की विवेचना अनावश्यक रूप से लंबित न रखी जाए और रात्रि गश्त को बढ़ाया जाए, ताकि अपराधियों पर शिकंजा कसा जा सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अभियोजन किसी सूरत में कमजोर नहीं होना चाहिए। राज्य में शांति भंग करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी और सुरक्षा से जुड़ी शिकायतों पर त्वरित संज्ञान लेने को कहा।

उन्होंने अभियोजन अधिकारियों की परफारमेंस आडिट रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। कहा, बंदियों के लिए स्किल डेवलपमेंट, पुनर्वास योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन और मानवाधिकारों का पालन कराया जाए। बैठक में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन समेत सभी जिलों के जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक तथा पुलिस एवं प्रशासन के अधिकारी मौजूद रहे।

एक्सप्रेसवे खुलने पर कोई अव्यवस्था न हो

सीएम धामी ने कहा, दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के खुलने के बाद राज्य में पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होगी, इसलिए होटल, आवास, पार्किंग, ट्रैफिक प्लान, यातायात प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी सभी तैयारियां समयबद्ध तरीके से पूरी की जाएं। उन्होंने निर्देश दिए कि किसी भी स्थिति में अव्यवस्था नहीं होनी चाहिए और पर्यटकों को सुरक्षित व सुगम अनुभव मिलना चाहिए।

शासन को भेजें नशा मुक्ति रिपोर्ट

सीएम धामी ने नशा मुक्ति अभियान को जन आंदोलन के रूप में संचालित करने पर जोर देते हुए कहा कि प्रत्येक जनपद से मासिक नशा मुक्ति रिपोर्ट सीधे शासन को भेजी जाए और गृह सचिव व पुलिस महानिदेशक इसकी नियमित समीक्षा करेंगे।

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