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हिमाचल के हर गांव का बनेगा विकास रोडमैप, हर वार्ड से चुने जाएंगे दो प्रमुख कार्य

​​​​​​​शिमला। हिमाचल प्रदेश के ग्रामीण विकास को नई गति देने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए पंचायतीराज विभाग ने प्रदेश के हर गांव के लिए विकास का रोडमैप तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। 16वें वित्त आयोग से प्राप्त राशि के प्रभावी उपयोग के लिए सभी ग्राम पंचायतों को निर्देश दिए गए हैं कि प्रत्येक वार्ड से दो-दो प्राथमिकता वाले विकास कार्य चिह्नित किए जाएं।

इन्हीं कार्यों के आधार पर पंचायतों की विकास योजना तैयार होगी। जिससे हर गांव की वास्तविक जरूरतों के अनुसार विकास कार्य पूरे किए जा सकें। अब पुरानी व्यवस्था नहीं चलेगी कि कुछ गांव के लिए ही विकास योजनाएं।

वार्ड स्तर पर बनेगा प्रस्ताव

हिमाचल प्रदेश की पंचायतों को 16वें वित्त आयोग के तहत 240 करोड़ रुपये की पहली किश्त मिल चुकी है। अब पंचायतों को तय समय में वार्ड स्तर पर प्रस्ताव तैयार कर ग्राम सभा की मंजूरी के बाद विकास योजनाओं को अमलीजामा पहनाना हागा। सरकार का उद्देश्य है कि धनराशि का उपयोग पारदर्शी तरीके से हो और हर गांव तक विकास का लाभ समान रूप से पहुंचे।

वार्ड सदस्य की भागीदारी से तैयारी होंगी योजनाएं

विभाग के निर्देशों के अनुसार पंचायतें स्थानीय आवश्यकताओं के आधार पर कार्यों का चयन करेंगी। वार्ड सदस्यों की भागीदारी से तैयार होने वाली यह योजना आने वाले वर्षों में गांवों के समग्र विकास की आधारशिला बनेंगी। इस बार विकास योजनाओं में लोगों की सीधी भागीदारी सुनिश्चित की गई है, जिससे वास्तव में जरूरी कार्यों को प्राथमिकता मिल सके।

पंचायतीराज विभाग ने स्पष्ट किया है कि विकास कार्यों के चयन में बुनियादी सुविधाओं, स्वच्छता, जल संरक्षण, सड़क संपर्क और सार्वजनिक परिसंपत्तियों को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके साथ ही योजनाओं के क्रियान्वयन की नियमित निगरानी भी की जाएगी।

पंचायतों के विकास कार्यों के लिए हर वार्ड से दो-दो कार्यों को चुनने और योजनाओं में शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं। विकास कार्यों की लगातार निगरानी और निरीक्षण के निर्देश दिए गए हैं।

इन कार्यों को मिलेगी प्राथमिकता

  • हर वार्ड से दो विकास कार्य अनिवार्य रूप से चयनित होंगे।
  • पेयजल व्यवस्था और जल संरक्षण।
  • गांव की संपर्क सड़कें, रास्ते और पुलियां।
  • नालियां, वर्षा जल निकासी और स्वच्छता कार्य।
  • स्ट्रीट लाइट एवं सार्वजनिक प्रकाश व्यवस्था।
  • सामुदायिक भवन, आंगनबाड़ी और पंचायत भवन का निर्माण व मरम्मत।
  • खेल मैदान, पार्क और सार्वजनिक स्थल।
  • ठोस एवं तरल कचरा प्रबंधन।
  • पर्यावरण संरक्षण, पौधरोपण और जलस्रोतों का संरक्षण।

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