लखनऊ. UGC रेगुलेशंस के विरोध में प्रदर्शन हेतु देश के कोने कोने से सवर्ण हिन्दूजन दिल्ली पहुंच रहे है,अनेक पहुंच भी चुके हैं…. 3 सप्ताह पूर्व पहले प्रदर्शन की अनुमति दी गई थी, अब जब बमुश्किल 24 घँटे रह गए तो UGC के खिलाफ प्रदर्शन पर अघोषित रोक लगा दी गईं है अर्थात अप्रत्यक्ष रूप से अनुमति वापस ले ली गई ! इस आंदोलन को दबाने पर वरिष्ठ राजनैतिक विश्लेषक हरेराम राय ने कहा. उन्होंने कहा कि अनेक लोगों को घर मे ही नज़रबंद कर दिया गया है… जिसमे अजित भारती, विनोद आज़ाद ,अनिल मिश्रा ,उदिता त्यागी, यति नरसिंहानंद और न जाने कितने नामालूम लोग नज़रबंद /पाबंद कर दिए गए हैं… कांग्रेस ने तो घोषित करके इमरजेंसी लगाई थी जिसे हमारी पीढ़ी ने नहीं देखा था किंतु आज जिस तरह से भाजपा सरकार ने अघोषित रूप से इमरजेंसी लगा रखी है वह प्रत्यक्ष रूप से देख रहे हैं और वो सभी लोग भी देख रहे हैं जिन्होंने इन्हें हिन्दू हृदय सम्राट बना रखा था और आगे विश्वगुरु बनते भी देखना चाह रहे थे।
क्या किसानों, अल्पसंख्यकों या दलितों के किसी प्रदर्शन पर अंतिम समय पर ऐसे रोक लगाई जा सकती थी ? दिल्ली की सड़कें 13-13 महीने किसान आंदोलन में बन्द पड़ी रहीं,शाहीन बाग में नेशनल हाइवे 4 महीने बन्द रहा, किंतु सवर्ण समाज एक दिन परमिशन लेकर भी अपना आंदोलन नहीं चला सकता,वो सरकार के सामने अपना विरोध नहीं दर्ज करा सकता, सभी वर्गों को सड़क पर उतर कर प्रदर्शन करने की छूट है सिर्फ़ सवर्ण समाज को छोड़कर, अब ये वक्त सवर्ण समाज के लिए अस्तित्व बचाने की लड़ाई बनता जा रहा है एक सनकी तानाशाह के खिलाफ, और ये तानाशाह सिर्फ और सिर्फ चुनाव में जीत हार की भाषा समझता है सिर्फ जीत हार की, अब ये समय निर्णायक लड़ाई का है आपको अपने प्रिय नेता प्रिय दल को बचाना है या अपने आने वाली नस्लों का अस्तित्व?


