शिवमोग्गा (कर्नाटक): शिवमोग्गा जिले में ‘मंकी फीवर’ के नाम से जाना जानेवाला क्यासानूर फॉरेस्ट डिजीज (KFD) ने एक युवक की जान ले ली. तीर्थहल्ली तालुक के कटागरु गांव के 29 वर्षीय युवक की बुधवार सुबह इलाज के दौरान मौत हो गई. स्वास्थ्य विभाग इस बात की जांच कर रहा है कि युवक इस संक्रमण की चपेट में कैसे आया. राहत की बात यह है कि मृतक के गांव में अब तक किसी अन्य व्यक्ति में KFD के लक्षण नहीं मिले हैं.
इलाज के दौरान तोड़ा दम
जानकारी के अनुसार, युवक को 21 जनवरी को तेज बुखार के बाद स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया था. 22 जनवरी को उसकी रिपोर्ट KFD पॉजिटिव आई, जिसके बाद उसकी गंभीर हालत को देखते हुए बेहतर इलाज के लिए मणिपाल रेफर कर दिया गया. जहां, इलाज के दौरान बुधवार सुबह अस्पताल में उसकी मौत हो गई.
क्या कहते हैं अधिकारी
ईटीवी भारत से बात करते हुए जिला सर्वेक्षक डॉ. नागराज नायक ने कहा, “यह सच है कि युवक KFD पॉजिटिव था. उसकी मौत आज सुबह हुई है, लेकिन मणिपाल अस्पताल से मौत के सटीक कारणों की आधिकारिक रिपोर्ट आना अभी बाकी है. जब तक वह रिपोर्ट नहीं मिल जाती, यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता कि मौत का कारण सिर्फ KFD था या कोई और बीमारी.”
क्या है केएफडी
क्यासानूर फॉरेस्ट डिजीज (KFD) या ‘मंकी फीवर’ एक वायरल बीमारी है. मुख्य रूप से संक्रमित किलनी (Ticks) के काटने से फैलती है. यह वायरस इंसानों में तब पहुंचता है जब वे जंगलों में संक्रमित बंदरों या किलनी के संपर्क में आते हैं. इसके मुख्य लक्षणों में तेज बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द और गंभीर मामलों में शरीर के अंदरूनी हिस्सों से खून बहना शामिल है.
क्या सावधानी बरतें
मंकी फीवर से बचाव के लिए राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC) और स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी गाइडलाइन के अनुसार, जंगल या प्रभावित क्षेत्रों में जाते समय पूरी आस्तीन के कपड़े पहनना और शरीर के खुले हिस्सों पर कीट विकर्षक लगाना सबसे प्रभावी उपाय है. इसके अलावा, जंगल से लौटने के बाद शरीर की अच्छी तरह जांच करनी चाहिए कि कहीं कोई ‘किलनी’ (Tick) चिपकी तो नहीं है. संक्रमण वाले इलाकों में टीकाकरण करवाना अनिवार्य है.


