नई दिल्ली: संसद द्वारा टैक्स और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित होने के बाद देश में यूपीआई (UPI) पेमेंट्स के भविष्य और इसके खर्चों को लेकर चल रही सभी अटकलों पर विराम लग गया है. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में स्पष्ट किया है कि आम ग्राहकों और नागरिकों के लिए यूपीआई भुगतान हमेशा की तरह पूरी तरह मुफ्त (फ्री) रहेगा. जनता की जेब पर इसका कोई सीधा असर नहीं होगा.
दरअसल, डिजिटल पेमेंट इंडस्ट्री का सालाना ऑपरेशनल खर्च करीब ₹20,700 करोड़ तक पहुंच चुका है. ऐसे में नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर, साइबर सुरक्षा और फ्रॉड रोकने की प्रणाली को मजबूत करने के लिए वित्त मंत्रालय ने बजट पर बोझ कम करते हुए ‘दो फॉर्मूले’ तैयार किए हैं.
सरकार के दो नए फॉर्मूले
मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, यूपीआई इकोसिस्टम को आत्मनिर्भर बनाने के लिए इन दो विकल्पों पर काम किया जा रहा है:
कैलिब्रेटेड एमडीआर (MDR) की वापसी: इसके तहत केवल बड़े कमर्शियल ट्रांजैक्शंस पर 0.3% से 0.5% का मामूली मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाया जाएगा. यह नियम केवल ₹2,000 से ऊपर के भुगतानों और ₹1.5 करोड़ (₹15 मिलियन) से अधिक के सालाना टर्नओवर वाले बड़े व्यापारियों पर ही लागू होगा.
टियर-आधारित इंसेंटिव स्ट्रक्चर: सरकारी सब्सिडी पर निर्भरता कम करने के लिए एक चरणबद्ध व्यवस्था बनाई जाएगी. वर्तमान में, डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने और छोटे दुकानदारों के नुकसान की भरपाई के लिए सरकार ने ₹2,000 करोड़ का बजट आवंटित किया है, जिसे अगले कुछ वर्षों में धीरे-धीरे कम किया जाएगा.
आम जनता और दुकानदारों पर क्या असर होगा?
इस नए ढांचे में आम ग्राहकों और छोटे व्यापारियों को पूरी तरह से सुरक्षित रखा गया है:
पूरी तरह फ्री सेवाएं: दोस्तों या परिवार को पैसे भेजने (P2P ट्रांसफर) पर ₹0 चार्ज लगेगा. इसके अलावा सब्जी वाले, चाय की दुकान, स्थानीय किराना स्टोर या किसी भी छोटे दुकानदार को QR कोड स्कैन करके पेमेंट करने पर कोई शुल्क नहीं देना होगा.
बड़े मर्चेंट्स पर असर: मॉल, बड़े शोरूम या बड़ी ई-कॉमर्स वेबसाइट्स से ₹2,000 से अधिक की खरीदारी करने पर केवल उन बड़े व्यापारियों को एमडीआर देना होगा. यह चार्ज भी क्रेडिट या डेबिट कार्ड के मुकाबले काफी कम होगा.
विशेषज्ञों का मानना है कि नए नियमों को लागू करने में देरी से पेमेंट कंपनियां केवल सीमित सरकारी सब्सिडी पर निर्भर हो सकती हैं, जिससे साइबर सुरक्षा और नेटवर्क अपग्रेडेशन जैसे जरूरी निवेश प्रभावित हो सकते हैं.
क्या होता है MDR
MDR (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) वह फीस है जो डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने पर ₹1.5 करोड़ से अधिक टर्नओवर वाले बड़े दुकानदार बैंक को देते हैं. यह ग्राहकों के लिए पूरी तरह फ्री है और ₹2,000 से कम के ट्रांजैक्शन इस दायरे से बाहर हैं.


