नोएडा। ऐसा प्रतीत होता है कि नोएडा के निवासी उत्तर प्रदेश का हिस्सा होते हुए भी अलग नियमों के तहत जीवन यापन कर रहे हैं। जहां पूरे उत्तर प्रदेश में 18 मीटर चौड़ी सड़कों पर मिक्स्ड लैंड यूज़ की अनुमति है, वहीं नोएडा प्राधिकरण द्वारा यह सीमा 24 मीटर निर्धारित की गई है, जो आम नागरिकों के साथ असमानता को दर्शाती है।
वर्तमान में नोएडा प्राधिकरण द्वारा औद्योगिक क्षेत्रों में 24 मीटर या उससे अधिक चौड़ी सड़कों पर मिक्स्ड लैंड यूज़ परिवर्तन के लिए औद्योगिक एवं व्यावसायिक दरों के अंतर का 25% शुल्क निर्धारित किया गया है। वहीं, आवासीय क्षेत्रों में यह शुल्क कमर्शियल और आवासीय सर्किल रेट के अंतर का 50% तक तय किया जा रहा है, जिसे आम जनता के हितों के विरुद्ध बताया जा रहा है।
इस संदर्भ में पूर्व में लागू व्यवस्था का उल्लेख करते हुए बताया गया कि पहले 24 मीटर या उससे अधिक चौड़ी सड़कों पर आवासीय क्षेत्रों के मिक्स्ड लैंड यूज़ परिवर्तन हेतु केवल 10% शुल्क लिया जाता था, जिसे अब बढ़ाकर 50% किया जाना प्रस्तावित है। यह वृद्धि आम नागरिकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डालने वाली है।
मांग की गई है कि नोएडा प्राधिकरण, जो कि उत्तर प्रदेश सरकार का ही एक अंग है, को राज्य के अन्य क्षेत्रों की भांति 18 मीटर सड़क पर मिक्स्ड लैंड यूज़ की अनुमति देनी चाहिए। साथ ही, आवासीय एवं औद्योगिक क्षेत्रों में मिक्स्ड लैंड यूज़ परिवर्तन के शुल्क को 10% से 15% के बीच सीमित रखा जाना चाहिए।
इसके अतिरिक्त आवासीय क्षेत्रों में मिक्स्ड लैंड यूज़ के अंतर्गत बैंक, क्रेच, प्ले स्कूल, लेडीज ब्यूटी पार्लर, गेस्ट हाउस, पीजी, जनरल स्टोर (ग्रॉसरी), क्लिनिक, नर्सिंग होम, प्रॉपर्टी डीलर, आर्किटेक्ट, चार्टर्ड अकाउंटेंट एवं इंटीरियर डिजाइनिंग कार्यालय जैसी आवश्यक सेवाओं को अनुमति देने की भी मांग की गई है, जिससे स्थानीय नागरिकों को सुविधा मिल सके।
यह भी आरोप लगाया गया कि मिक्स्ड लैंड यूज़ की वर्तमान नीति कुछ चुनिंदा लोगों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से लाई गई प्रतीत होती है, जबकि आम जनता को इससे वंचित रखा जा रहा है।
दीपक विग पूर्व महानगर अध्यक्ष (सपा), चेयरमैन पंजाबी विकास मंच,
राजनीतिक एवं सामाजिक विचारक


