वी पी एस खुराना
मथुरा जनपद में सरकार एक ओर जहां ‘वृक्षारोपण अभियान’ चलाकर पर्यावरण बचाने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी ओर जिले के धौरेरा /अक्रूर के जंगलों में वन माफियाओं ने तांडव मचा रखा है। विभागीय अधिकारियों की कथित ‘कुंभकर्णी नींद’ का फायदा उठाकर बेश कीमती पेड़ों को धड़ल्ले से काटा जा रहा है। आलम यह है कि जंगल अब मैदान में तब्दील होने की कगार पर हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी ऐ सी कमरों से बाहर निकलने को तैयार नहीं हैं।
रात के अंधेरे में साफ हो रहे
स्थानीय लोगों अनुसार धौरेरा /अक्रूर के संरक्षित वन क्षेत्रों माफियाओं का नेटवर्क सक्रिय है। रात के सन्नाटे में आरा मशीनों की गूंज सुनाई देती है, लेकिन वन विभाग की गश्ती टीमें नदारद रहती हैं।
दर्जनों ठूंठ दे रहे गवाही: जंगल के अंदर जाने पर कटे हुए पेड़ों के ताजे ठूंठ साफ देखे जा सकते हैं कुछ जंगली जानवर अपना आशियाना खो गए कुछ मृत्यु हुई कुछ इधर-उधर भागने लगे पूर्व में भी बड़े मामले वन कटान के मथुरा में होते रहे हैं
हैरानी की बात यह है कि जब इस संबंध में विभागीय अधिकारियों से संपर्क किया गया तो उनका रटा-रटाया जवाब होता है— “मामला संज्ञान में नहीं है, जांच करवाएंगे।”


