सीएचसी रुदौली में जटिल हालात के बीच कराया सुरक्षित नॉर्मल प्रसव, धैर्य और सेवा ने जीता हर दिल
मोहम्मद आलम
अयोध्या। हर दर्द की एक कहानी होती है… और हर कहानी में एक उम्मीद। लेकिन जब उम्मीदें भी साथ छोड़ने लगें, तब अगर कोई हाथ थाम ले तो वह सिर्फ डॉक्टर नहीं, किसी फरिश्ते से कम नहीं होता। ऐसा ही एक दिल को छू लेने वाला मामला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रुदौली से सामने आया, जहां डॉ. फातिमा हसन रिजवी ने अपने अनुभव, धैर्य और इंसानियत से एक परिवार को टूटने से बचा लिया।
ग्राम पारा पहाड़पुर निवासी पत्रकार अर्जुन भट्ट के परिवार पर उस वक्त दुखों का पहाड़ टूट पड़ा, जब उनकी पत्नी के गर्भ में सात माह का शिशु नहीं बच सका और उनकी हालत लगातार बिगड़ने लगी। घर का माहौल मातम और डर में बदल गया। परिजन उन्हें एक के बाद एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां लगभग हर जगह एक ही सलाह मिली तुरंत ऑपरेशन।
हर गुजरते पल के साथ चिंता गहराती जा रही थी। डर, असमंजस और बेबसी के बीच आखिरकार परिजन उम्मीद की एक आखिरी किरण लेकर सीएचसी रुदौली पहुंचे।
यहां अधीक्षक डॉ. फातिमा हसन रिजवी ने बिना किसी हड़बड़ी के, पूरे धैर्य और गंभीरता से मरीज की स्थिति को समझा। उन्होंने न सिर्फ इलाज शुरू किया, बल्कि परिजनों के दिल में भरोसा भी जगाया।
चुनौती आसान नहीं थी प्रसूता का पहला प्रसव सीजर ऑपरेशन से हुआ था, जिससे इस बार भी ऑपरेशन की संभावना जताई जा रही थी। लेकिन डॉ. फातिमा ने अनुभव और आत्मविश्वास के साथ फैसला लिया कि सही देखभाल और निगरानी से नॉर्मल प्रसव संभव है।
फिर शुरू हुआ इंतज़ार… घंटों की निगरानी, हर पल सतर्कता और पूरी टीम की अथक मेहनत।
और आखिरकार, वह सुकून भरा लम्हा आया जब प्रसूता का सुरक्षित नॉर्मल प्रसव हो गया।
जैसे ही मां की हालत स्थिर हुई, परिवार के चेहरे पर राहत के आंसू छलक पड़े। जो घर कुछ देर पहले चिंता में डूबा था, वहां अब दुआओं और शुक्रिया की गूंज थी।
इस मानवीय सेवा के लिए अर्जुन भट्ट ने भावुक होकर डॉ. फातिमा हसन रिजवी, वार्ड आया प्रवीन बानो और पूरी टीम का दिल से आभार जताया। उन्होंने कहा कि आज हमें सिर्फ इलाज नहीं मिला, बल्कि एक नई उम्मीद मिली है।
यह घटना सिर्फ एक सफल प्रसव की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस सच्चाई का आईना है कि सरकारी अस्पतालों में भी ऐसे डॉक्टर मौजूद हैं, जो मरीजों के दर्द को महसूस करते हैं और हर हाल में उनकी जिंदगी को संवारने की कोशिश करते हैं।
सीएचसी रुदौली में डॉ. फातिमा हसन रिजवी का यह कार्य अब क्षेत्र में मिसाल बन चुका है। लोग कह रहे हैं जब हालात सबसे मुश्किल होते हैं, तब ही असली हीरो सामने आते हैं… और इस बार वो हीरो थीं डॉ. फातिमा।


