हैदराबाद: नीट पेपर लीक को लेकर जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शनों पर अभिनेत्री भूमि पेडनेकर की कमेंट्स ने ऑनलाइन बहस छेड़ दी है. प्रतिक्रिया देने वालों में आध्यात्मिक मनोचिकित्सक श्रुति देसाई भी शामिल थीं, जिन्होंने दावा किया कि उन्होंने मुंबई स्थित एक अभिनय स्कूल में कुछ समय के लिए भूमि को पढ़ाया था. ‘सम्मान’ और ‘जिम्मेदारी’ पर अभिनेत्री की टिप्पणियों का जिक्र करते हुए, देसाई ने उनके रुख पर सवाल उठाया, जिससे सोशल मीडिया पर पहले से चल रही बहस में एक और बहस छिड़ गई.
श्रुति देसाई की ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं जब भूमि पेडनेकर NEET-UG 2026 विरोध प्रदर्शनों से संबंधित अपने सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर पहले से ही आलोचनाओं का सामना कर रही हैं. जहां कई सोशल मीडिया यूजर्स ने देसाई की राय की सराहना की, वहीं कुछ अन्य लोगों का मानना था कि अभिनेत्री को उनकी किशोरावस्था की घटनाओं के आधार पर आंकना ठीक नहीं है.
इंस्टाग्राम पर देसाई ने मुंबई स्थित एक एक्टिंग स्कूल में भूमि के साथ बिताए अपने संक्षिप्त समय को याद किया और उनके नजरिए में आए बदलाव पर सवाल उठाया. उन्होंने लिखा था, ‘@bhumisatishpednekkar मुझे याद है कि मैं मुंबई के एक फिल्म स्कूल में कुछ समय के लिए आपकी शिक्षिका थी. दुर्भाग्य से, मुझे यह भी याद है कि आप अपने शिक्षकों के प्रति कितने अनादरपूर्ण, लगभग तिरस्कारपूर्ण थी. क्या आप सम्मान और जिम्मेदारी की अवधारणाओं के प्रति अपने नए नजरिए और इस बीच आपके विचार में आए इतने बड़े बदलाव के बारे में कुछ बता सकती हैं?
पोस्ट के ऑनलाइन आने के तुरंत बाद, नेटिजन्स से मिली-जुली प्रतिक्रियाएं मिलीं. एक यूजर ने लिखा, ‘तो आपके अनुसार, अगर कोई बचपन में असभ्य और कठोर व्यवहार करता है, तो क्या उसे जीवन भर वैसा ही रहना चाहिए? एक शिक्षक से ऐसी उम्मीद नहीं थी. एक अन्य यूजर ने टिप्पणी की, ‘यह तो कमाल है’. एक तीसरे यूजर ने लिखा, ‘और वो भी 15 साल की लड़की को निशाना बनाना, उसे समर्थन के दो शब्द कहने की बजाय’. एक टिप्पणी में यह भी लिखा था, ‘सच बोलने के लिए धन्यवाद’.
यह विवाद तब शुरू हुआ जब भूमि ने NEET-UG 2026 के विरोध प्रदर्शनों से संबंधित वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किए. एक वीडियो में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अपमानजनक नारों के इस्तेमाल की आलोचना करते हुए कहा कि देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद के प्रति इस तरह की अपमानजनक भाषा का प्रयोग अस्वीकार्य है. उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि असहमति को व्यक्तिगत हमलों के बजाय सभ्य और सम्मानजनक बातचीत के माध्यम से व्यक्त किया जाना चाहिए.
हालांकि, उनकी टिप्पणियों ने ऑनलाइन कड़ी प्रतिक्रिया को जन्म दिया. कई सोशल मीडिया यूजर्स ने अभिनेत्री पर मुद्दे का केवल एक पक्ष प्रस्तुत करने का आरोप लगाया और कहा कि उन्होंने 20 जुलाई के संसद मार्च के दौरान छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई के आरोपों का उल्लेख नहीं किया. कई लोगों ने सवाल उठाया कि उनके वीडियो में उन रिपोर्ट का जिक्र क्यों नहीं किया गया, जिनमें दावा किया गया था कि प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज, आंसू गैस और जबरन तितर-बितर किया गया था.


