लखनऊः सोनभद्र जिले की दुद्धी विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ विधायक विजय सिंह गोंड का 71 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने लखनऊ स्थित संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (SGPGI) में अंतिम सांस ली. विजय सिंह गोंड लंबे समय से गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। उनकी दोनों किडनियां खराब हो चुकी थीं, जिसके चलते उन्हें SGPGI में भर्ती कराया गया था.
विधायक के निधन की खबर मिलते ही राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई. समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव स्वयं SGPGI पहुंचे और शोक संतप्त परिजनों से मुलाकात कर गहरी संवेदना व्यक्त की. अखिलेश यादव ने कहा कि विजय सिंह गोंड का जाना न केवल पार्टी, बल्कि प्रदेश की आदिवासी राजनीति के लिए अपूरणीय क्षति है.
जिले दुद्धी विधानसभा क्षेत्र से समाजवादी पार्टी के विधायक विजय सिंह गोंड का निधन गुरुवार की सुबह हो गया. विजय सिंह गोंड़ लंबे समय से बीमार चल रहे थे. विजय सिंह गोंड़ किडनी फेलियर समेत अन्य बीमारियों से ग्रसित थे और पीजीआई में उनका इलाज चल रहा था. पिछले तीन माह से कोमा में थे. गुरुवार सुबह विधायक की मृत्यु की सूचना मिली तो समर्थकों में शोक की लहर फैल गयी.
बता दें कि विजय सिंह गोंडा राजनीतिक इतिहास काफी लंबा रहा है. विजय सिंह गोंड 8 बार विधायक चुने गए थे. सपा के रॉबर्ट्सगंज सीट से विधायक रह चुके अविनाश कुशवाहा ने बताया कि विजय सिंह गोंड का निधन गुरुवार सुबह हो गया. शव आज रात्रि तक सोनभद्र में पहुंचेगा.
विजय सिंह गोंड का राजनितक करियरः विजय सिंह गोंड दुद्धी विधानसभा सीट से रिकॉर्ड आठ बार विधायक रहे. बेहद साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर उन्होंने राजनीति में एक लंबा और संघर्षपूर्ण सफर तय किया. वर्ष 1979 में वनवासी सेवा आश्रम में मात्र 200 रुपये मासिक मानदेय पर काम करते हुए उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर पहली बार विधानसभा चुनाव जीतकर राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी.
अपने ही राजनीतिक गुरु को दी थी मातः इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. वर्ष 1989 में अपने राजनीतिक गुरु रामप्यारे पनिका को पराजित कर उन्होंने आदिवासी राजनीति में एक नया अध्याय लिखा. समय के साथ वे विभिन्न दलों से होते हुए आठ बार विधानसभा पहुंचे और प्रदेश की राजनीति में आदिवासी समाज की मजबूत आवाज बने. विजय सिंह गोंड ने दुद्धी और ओबरा विधानसभा सीट को अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक कानूनी लड़ाई लड़ी. सदन के भीतर और बाहर वे लगातार आदिवासी अधिकारों, जल-जंगल-जमीन और सामाजिक न्याय के मुद्दों को उठाते रहे. उनके प्रयासों से आदिवासी समाज को प्रदेश की राजनीति में नई पहचान मिली.
तीन विधानसभा सीट खालीः इससे पहले समाजवादी पार्टी के घोसी विधानसभा से विधायक सुधाकर सिंह का भी निधन हो चुका है, जिससे घोसी सीट रिक्त हो गई थी. वहीं, भाजपा के एक विधायक के निधन के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनके परिजनों से मुलाकात कर शोक संवेदना व्यक्त की थी. ताजा घटनाक्रम के बाद अब प्रदेश में तीन विधानसभा सीटें विधायकों के निधन के कारण रिक्त हो चुकी हैं, जिससे आने वाले समय में उपचुनाव की संभावनाएं भी बढ़ गई हैं.


