रमज़ान सिर्फ रोज़ा नहीं, पूरी ज़िंदगी की इस्लाह का महीना है : मौलाना नदवी
मोहम्मद आलम
अयोध्या। रहमतों और बरकतों के पाक महीने रमज़ान के पहले जुमे पर शहर की फिज़ा इबादत और रूहानियत से महक उठी। जैसे ही जुमा की अज़ान की सदाएं बुलंद हुईं, मस्जिदों की जानिब अकीदतमंदों का सैलाब उमड़ पड़ा। सजदों की कतारें लंबी होती गईं और हर दिल अल्लाह की रज़ा हासिल करने की तमन्ना में झुकता नजर आया।
रूदौली क्षेत्र की छोटी-बड़ी तमाम मस्जिदों में जुमा की नमाज़ पूरे एहतिराम और खुश्कू-खुज़ू के साथ अदा की गई। मस्जिदें नमाजियों से खचाखच भर गईं। पूरा दिन इबादत-ए-इलाही, तिलावत-ए-कुरआन, तस्बीह और जिक्र में गुजरा। फर्ज नमाज़ों के साथ नफ्ल नमाज़ों की भी कसरत रही और हर जुबां पर मगफिरत की दुआ थी।
इस मौके पर मौलाना मुजाहिद उल इस्लाम नदवी ने अपने बयान में कहा कि रमज़ान आत्म-सुधार और तक़वा हासिल करने का महीना है। उन्होंने कहा कि रोज़ा इंसान को सब्र, शुक्र और परहेज़गारी की तालीम देता है। असल रोज़ा वही है, जिससे अल्लाह राज़ी हो जाए और इंसान की ज़िंदगी में नेक बदलाव नजर आए।
उन्होंने कहा कि मुसलमानों को चाहिए कि वे इस मुबारक महीने के हर लम्हे को गनीमत समझें, फर्ज़ के साथ-साथ नफ़्ल इबादतों का भी एहतिमाम करें, कुरआन की तिलावत बढ़ाएं और जरूरतमंदों की मदद को अपनी ज़िम्मेदारी समझें। रमज़ान में की गई नेकियां कई गुना बढ़ा दी जाती हैं, इसलिए यह महीना अपने किरदार और अख़लाक़ को बेहतर बनाने का बेहतरीन मौका है।
सुबह रोजेदारों ने सेहरी कर नमाज़-ए-फज्र अदा की। पुरुषों ने मस्जिदों में तो महिलाओं ने घरों में इबादत की और कुरआन शरीफ की तिलावत की। इसके बाद जुमा की तैयारी शुरू हुई। गुस्ल कर साफ-सुथरे कपड़े पहने गए, इत्र लगाया गया और मस्जिदों का रुख किया गया।
इमाम ने तकरीर में रोजे की फजीलत और रमज़ान के एहतराम पर रोशनी डाली। शाम होते-होते इफ्तार की तैयारियां शुरू हो गईं। दस्तरख्वान लजीज पकवानों से सज गए। जैसे ही इफ्तार का वक्त हुआ, रोजेदारों ने दुआ के साथ रोजा खोला और मग़रिब की नमाज़ अदा की। इसके बाद ईशा व तरावीह की नमाज़ के साथ पहला जुमा अल्लाह की रज़ा और रहमतों के साए में मुकम्मल हुआ।
इस तरह रमज़ान का पहला जुमा अयोध्या और रूदौली में पूरी अकीदत, इबादत और रूहानी कैफियत के साथ गुजरा।


