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हिमाचल के हितों से कोई समझौता नहीं: सीएम सुक्खू का बड़ा बयान

शिमला: मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू कहा कि कि प्रदेश सरकार हिमाचल के हितों और संसाधनों के साथ कोई समझौता नहीं किया। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने किशाऊ जलविद्युत परियोजना, बीबीएमबी में राज्य के हिस्से और पूर्व सरकारों की नीतियों को लेकर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि किशाऊ प्रोजैक्ट में कड़ा रुख अपनाने के कारण अब हिमाचल को बिना किसी निवेश के 211 मैगावाट मुफ्त बिजली मिलेगी, जिससे 5 साल बाद राज्य को हर साल करीब 600 करोड़ रुपए की आमदनी होगी। मुख्यमंत्री सुक्खू शुक्रवार को हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में नए अकादमिक ब्लॉक का शिलान्यास और कम्प्यूटर आधारित परीक्षा (सीबीटी) लैब का उद्घाटन करने पहुंचे थे।

किशाऊ प्रोजैक्ट को लेकर केंद्र के सामने मजबूती से रखा अपना पक्ष

मुख्यमंत्री ने बताया कि पुरानी व्यवस्था के तहत किशाऊ परियोजना से बनने वाली बिजली के लिए हिमाचल और उत्तराखंड को भी भुगतान करना पड़ना था, लेकिन, वर्तमान सरकार ने केंद्र के समक्ष मजबूती से अपना पक्ष रखा। सीएम ने कहा कि इस परियोजना का पानी हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान को मिलेगा, इसलिए इसका पूरा वित्तीय भार भी इन्हीं राज्यों और केंद्र सरकार को उठाना चाहिए। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री और अन्य राज्यों के साथ कई दौर की बैठकों के बाद आखिरकार हिमाचल के हित सुरक्षित कर लिए गए हैं।

बीबीएमबी और पूर्व सरकारों पर साधा निशाना

भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) के मुद्दे पर सीएम सुक्खू ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद पिछले 14 वर्षों से हिमाचल को उसका पूरा अधिकार और हिस्सा नहीं मिला है। राज्य सरकार इस लड़ाई को मजबूती से लड़ रही है। उन्होंने पूर्व सरकारों पर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने राज्य की भूमि और संसाधनों की भारी अनदेखी की। सीएम ने खुलासा किया कि मेडिकल डिवाइस पार्क जैसी परियोजनाओं में राज्य की जमीन और बिजली बेहद कम दरों पर देने का भारी दबाव था, लेकिन उनकी सरकार ने इसे सिरे से खारिज कर दिया क्योंकि इससे प्रदेश को भारी आर्थिक नुक्सान होता।

60 साल बाद राज्य को वापस मिलें पावर प्रोजैक्ट

जलविद्युत परियोजनाओं से मिलने वाली रॉयल्टी के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने एक बड़ा विजन सामने रखा। उन्होंने कहा कि जिन परियोजनाओं का लोन (ऋण) चुकता हो चुका है, उनमें हिमाचल का हिस्सा बढ़ाया जाना चाहिए। इसके साथ ही एक नियम यह भी होना चाहिए कि 60 वर्ष पूरे होने के बाद ये परियोजनाएं स्वतः राज्य को वापस मिल जाएं, ताकि भविष्य में प्रदेश और युवा पीढ़ी को इनका लाभ मिल सके।

सरकार के नीतिगत फैसलों का हो सम्मान

आऊटसोर्स भर्ती मामले पर अपना रुख स्पष्ट करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की नीति संबंधी निर्णय लेने की शक्तियों का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर किसी नीति में सुधार की गुंजाइश या आवश्यकता है, तो उस पर चर्चा की जा सकती है, लेकिन इसके कारण राज्य के विकास कार्यों और रोजगार सृजन की प्रक्रिया में कोई बाधा नहीं आनी चाहिए।

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