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OYO की पैरेंट कंपनी Prism लाएगी 6,650 करोड रुपये का IPO, मौजूदा निवेशक नहीं बेचेंगे एक भी शेयर, जानें डिटेल्स

नई दिल्ली: ओयो की पैरेंट कंपनी प्रिज्म ने भारतीय शेयर बाजार नियामक सेबी के पास आईपीओ के लिए अपने अपडेटेड ड्राफ्ट पेपर (UDRHP) जमा करा दिए हैं. कंपनी इस पब्लिक इश्यू के जरिए ₹6,650 करोड़ जुटाने की तैयारी में है. प्रिज्म ने सितंबर 2025 में ही अपना नाम बदला था.

प्रमोटर्स और मौजूदा निवेशक नहीं बेचेंगे अपनी हिस्सेदारी

|इस आईपीओ की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह पूरी तरह से ‘फ्रेश इश्यू’ यानी नए शेयरों का जारी होना है. इसमें कोई भी ऑफर फॉर सेल (OFS) कंपोनेंट शामिल नहीं है. इसका सीधा मतलब है कि सॉफ्टबैंक, संस्थापक रितेश अग्रवाल, माइक्रोसॉफ्ट, एयरबीएनबी, लाइटस्पीड और पीक XV जैसे बड़े मौजूदा निवेशक अपनी हिस्सेदारी नहीं बेच रहे हैं. कंपनी के पास मुख्य आईपीओ से पहले ₹1,330 करोड़ का प्री-आईपीओ प्लेसमेंट लाने का विकल्प भी मौजूद है.

₹4,987 करोड़ से चुकाया जाएगा कर्ज

कंपनी आईपीओ से मिलने वाली रकम का एक बड़ा हिस्सा (करीब ₹4,987.5 करोड़) अपने पुराने कर्ज को चुकाने या समय से पहले उसका भुगतान करने के लिए इस्तेमाल करेगी. बाकी बची हुई राशि का उपयोग सामान्य कॉर्पोरेट उद्देश्यों के लिए किया जाएगा. इससे कंपनी की बैलेंस शीट काफी मजबूत होगी. इसी वित्तीय सुधार को देखते हुए रेटिंग एजेंसी एसएंडपी (S&P) ग्लोबल ने कंपनी का आउटलुक ‘स्टेबल’ से बढ़ाकर ‘पॉजिटिव’ कर दिया है.

मुनाफे और रेवेन्यू में भारी उछाल

प्रिज्म के वित्तीय नतीजों में वित्त वर्ष 2026 के पहले 9 महीनों (9MFY26) में जबरदस्त सुधार देखा गया है. दिसंबर 2025 को समाप्त अवधि में कंपनी का परिचालन रेवेन्यू ₹6,941 करोड़ रहा, जो पूरे वित्त वर्ष 2025 के रेवेन्यू (₹6,259 करोड़) को भी पार कर गया है. इस दौरान कंपनी का शुद्ध लाभ (PAT) उछलकर ₹748 करोड़ पर पहुंच गया, जबकि पिछले पूरे साल यह महज ₹245 करोड़ था.

ग्लोबल बिजनेस बना ग्रोथ इंजन

प्रिज्म मौजूदा समय में 35 से अधिक देशों में 43 ब्रांड्स का संचालन करती है. इसके नेटवर्क में 24,000 से अधिक होटल और 1.24 लाख से ज्यादा घर शामिल हैं. अमेरिकी कंपनी ‘G6 हॉस्पिटैलिटी’ (मोटेल 6 ब्रांड) के अधिग्रहण के बाद अमेरिका इसका सबसे बड़ा ग्रोथ इंजन बन गया है. चालू वित्त वर्ष के पहले 9 महीनों में कंपनी की कुल ग्रॉस बुकिंग वैल्यू (GBV) में अकेले अमेरिका का योगदान 52 फीसदी से अधिक रहा है. वहीं भारत में भी कंपनी के सर्विस स्टोरफ्रंट्स की संख्या बढ़कर 1,573 हो गई है. इसके अलावा दिल्ली आईटीएटी (ITAT) द्वारा कंपनी के पक्ष में ₹3,885 करोड़ की टैक्स डिमांड को रद्द करना भी इस आईपीओ के लिए एक बड़ी राहत माना जा रहा है.

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