Mediasamvad24

33.2 C
Noida
Sunday, August 30, 2026

Buy now

spot_img

हिमाचल में नई रोजगार योजना पर सियासत, कांग्रेस और सरकार में टकराव

शिमला। हिमाचल प्रदेश की सुखविन्द्र सिंह सुक्खू सरकार ने मनरेगा के स्थान पर वीबी-जीरामजी (विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन) योजना का मसौदा तैयार किया है, जिसका लगातार कांग्रेस व सरकार की ओर से विरोध किया जा रहा है। यह योजना पहली जुलाई से प्रदेश में लागू की जाएगी। मनरेगा की तुलना में इस योजना में 10 प्रतिशत के अंशदान के कारण प्रदेश को 160 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान होने का अनुमान है।

विधि विभाग से मंजूरी मिलने के बाद इस पर आगामी मंत्रिमंडल की बैठक में निर्णय लिया जाएगा। ग्रामीण विकास विभाग ने इस योजना का पूरा मसौदा तैयार कर विधि विभाग के पास भेजा था।

1800 करोड़ रुपये वार्षिक मिलने की उम्मीद

योजना के तहत प्रदेश को सालाना 1600 से 1800 करोड़ रुपये मजदूरी और सामग्री शीर्ष के तहत मिलने की उम्मीद है। मनरेगा में 100 प्रतिशत केंद्र सरकार की ओर से वित्तीय सहायता मिलती है, जबकि वीबी-जीरामजी योजना में राज्य को 10 प्रतिशत अंशदान देना होगा।

अंशदान के कारण विरोध

प्रदेश सरकार का विरोध इस कारण है कि राज्य के अंशदान के कारण उसे वित्तीय नुकसान होगा। इसके अलावा, कृषि और बागवानी सीजन के दौरान मजूदरों को अवकाश दिए जाने के प्रविधान से मजदूरों के परिवारों को 150 दिनों का रोजगार नहीं मिलने की आशंका जताई जा रही है।

वीबी-जीरामजी योजना के प्रमुख प्रविधान

  • मनरेगा की जगह इसे पहली जुलाई से पूरे देश में लागू किया जाएगा।
  • प्रत्येक पात्र ग्रामीण परिवार को वर्ष में अधिकतम 150 दिन का रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा।
  • रोजगार के साथ आजीविका आधारित गतिविधियों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
  • कृषि और बागवानी कार्य प्रभावित न हों, इसके लिए बुवाई, रोपाई, फसल कटाई और बागवानी सीजन के दौरान श्रमिकों को विशेष अवकाश मिलेगा।
  • यह योजना केंद्र और राज्य सरकारों की साझेदारी से संचालित होगी।
  • कार्यस्थलों पर श्रमिकों की उपस्थिति डिजिटल माध्यम से दर्ज की जाएगी।
  • योजना के सभी कार्यों का नियमित सोशल आडिट किया जाएगा।

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

0FansLike
0FollowersFollow
0SubscribersSubscribe
- Advertisement -spot_img

Latest Articles