शिमला। हिमाचल प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों में विकास कार्यों और सरकारी आश्वासनों के क्रियान्वयन की धीमी रफ्तार पर विधानसभा की कल्याण समिति ने सवाल उठाए हैं।
किन्नौर के शिपकीला में प्रस्तावित ट्रेड सेंटर का मामला वर्षों से लंबित होने पर समिति ने इसकी ताजा स्थिति की रिपोर्ट तलब की है। चार बार निविदा न आने के बाद वर्ष 2023 में कार्य आबंटित किया गया था, लेकिन अब तक की प्रगति स्पष्ट नहीं होने पर समिति ने दोबारा रिपोर्ट मांगी है।
समिति ने एकलव्य हास्टल के निर्माण में भी देरी पर नाराजगी जताई। लड़कों के हास्टल नंबर-1 तथा लड़कियों के हास्टल नंबर-2 और 3 की धीमी प्रगति को लेकर निर्माण एजेंसी को जारी राशि और निर्माण कार्य की फोटो सहित ताजा रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं।
भूमि से जुड़े पेंडिंग मामलों में जानकारी देने के लिए कहा
किन्नौर, लाहुल स्पीति और चंबा में नौतोड़ भूमि आबंटन तथा वन अधिकार अधिनियम (एफआरए) के तहत एक हेक्टेयर तक भूमि से जुड़े लंबित मामलों पर भी सरकार से स्थिति स्पष्ट करने को कहा गया है।
जनजातीय विकास विभाग से संबंधित आश्वासनों की समीक्षा में समिति ने एक आश्वासन को पूरा मानकर समाप्त कर दिया, जबकि नौ आश्वासनों को लंबित रखते हुए विभाग से विस्तृत रिपोर्ट दोबारा मांगी है।
जून 2025 तक किन्नौर की जिलास्तरीय समिति ने एफआरए-2006 के तहत 461 व्यक्तिगत दावों को अंतिम स्वीकृति देकर पट्टे जारी किए हैं। इनमें पूह के 109, कल्पा के 277 और निचार के 75 दावे शामिल हैं। प्रदेश में एफआरए कैलेंडर 2025-26 भी लांच किया गया है।
ट्राइबल सब-कैडर में स्थानीय तैनाती की सिफारिश
कल्याण समिति ने जनजातीय और पिछड़ा वर्ग कोटे से नियुक्त अधिकारियों और कर्मचारियों की सेवाएं अनिवार्य रूप से जनजातीय क्षेत्रों में लेने की सिफारिश की है। वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत 2025-26 में कोई अतिरिक्त गांव शामिल नहीं किए जाने और भरमौर में 13 लाख रुपये के कम्युनिटी हाल की स्वीकृति रद्द होने पर भी समिति ने सवाल उठाए हैं।
ट्रांस-गिरी क्षेत्र और हाटी समुदाय से जुड़े अदालती मामलों सहित अन्य लंबित आश्वासनों पर समिति ने विभाग को निर्धारित समय सीमा में ठोस कार्रवाई कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं।


