नई दिल्ली: भारत में परमाणु संयंत्र चलाने वाली कंपनियों के लिए अब बीमा पॉलिसी या वित्तीय सुरक्षा बनाए रखना कानूनी रूप से अनिवार्य होगा. परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) द्वारा शुक्रवार को जारी ‘शांति अधिनियम, 2025’ (SHANTI Act) के मसौदा नियमों में यह बात कही गई है. सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह वित्तीय सुरक्षा तब तक लागू रहेगी, जब तक कि संबंधित स्टोरेज पूल से सारा ‘स्पेंट फ्यूल’ (इस्तेमाल हो चुका परमाणु ईंधन) पूरी तरह से हटा नहीं लिया जाता.
पांच साल में होगी जिम्मेदारी की समीक्षा
नियमों के अनुसार, केंद्र सरकार हर पांच साल में विशेषज्ञों का एक समूह गठित करेगी. यह समूह परमाणु नुकसान के लिए किसी ऑपरेटर की नागरिक जिम्मेदारी की अधिकतम सीमा की समीक्षा करेगा.
विदेशी तकनीक पर सख्त नियम
यदि कोई परमाणु ऊर्जा संयंत्र या रिएक्टर विदेशी डिजाइन का है, तो उसके डिजाइन को मूल देश के नियामक बोर्ड द्वारा प्रमाणित या स्वीकृत होना जरूरी है. नियमों के तहत ‘मूल देश’ का मतलब उन देशों से है जो रिएक्टर डिजाइन और अपनी सप्लाई चेन में पूरी तरह आत्मनिर्भर हैं, और जिनकी नियामक स्वीकृतियों पर दुनिया भर में भरोसा किया जाता है. इसके साथ ही, वह रिएक्टर तकनीक मूल देश या किसी अन्य विदेशी देश में पहले से व्यावसायिक रूप से चालू होनी चाहिए.
व्यापार करना हुआ आसान
मसौदा नियमों के अनुसार, लाइसेंसिंग अथॉरिटी आवेदन स्वीकार करने के बाद ‘इन-प्रिंसिपल अप्रूवल’ (सैद्धांतिक मंजूरी) दे सकती है, भले ही उस समय तक साइट या तकनीक का चयन न किया गया हो. यह वैध मंजूरी मिलने के बाद आवेदक कंपनियां रिएक्टर तकनीक के वेंडरों से बातचीत करने, जमीन खरीदने और अन्य जरूरी बुनियादी ढांचा जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर सकती हैं.
सिंगल कंपोजिट लाइसेंस
नियमों में यह भी कहा गया है कि अब परमाणु संयंत्र या रिएक्टर के निर्माण, मालिकाना हक, संचालन और उसे बंद करने के लिए एक ही ‘सिंगल कंपोजिट लाइसेंस’ दिया जाएगा. इनमें से किसी भी गतिविधि के लिए अलग से कोई लाइसेंस न तो मांगा जा सकेगा और न ही मंजूर किया जाएगा.


