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Monday, August 31, 2026

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क्या अमेरिका ईरान पर परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करेगा? राष्ट्रपति ट्रंप ने दिया जवाब

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ चल रहे संघर्ष में परमाणु हथियारों के इस्तेमाल से साफ इनकार कर दिया है. उन्होंने कहा कि अमेरिका ने पारंपरिक हमलों से ही ईरान को भारी नुकसान पहुंचा दिया है. ऐसे में परमाणु हथियारों के इस्तेमाल का कोई सवाल नहीं है.

गुरुवार को व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा, ‘मैं परमाणु हथियार क्यों इस्तेमाल करूं? हमने बिना इसके भी उन्हें पारंपरिक तरीके से पूरी तरह तबाह कर दिया है. नहीं, मैं इसका इस्तेमाल नहीं करूंगा. परमाणु हथियार किसी को भी कभी इस्तेमाल नहीं करने चाहिए.’

उन्होंने विश्वास जताया कि अमेरिका ने बिना इन घातक हथियारों के ही ईरान की सैन्य कमर तोड़ दी है.

‘ईरान के पास नहीं है वक्त’

इससे पहले डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ कोई समझौता करने के लिए वाशिंगटन पर दबाव होने की खबरों को खारिज कर दिया था. उन्होंने ट्रुथ सोशल पर प्रतिष्ठित अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स और सीएनएन पर निशाना साधा है. उन्होंने लिखा, ‘जो लोग अब भी ‘फेलिंग न्यूयॉर्क टाइम्स’ पढ़ते हैं या ‘फेक न्यूज CNN’ देखते हैं और सोचते हैं कि मैं ईरान के साथ युद्ध (अगर इसे युद्ध भी कह सकते हैं) जल्दी खत्म करने के लिए ‘बेचैन’ हूं, उन्हें बता दूं कि मैं इस पद पर शायद सबसे कम दबाव में रहने वाला व्यक्ति हूं.’

ट्रंप ने दावा किया कि मेरे पास दुनिया का पूरा समय है, लेकिन ईरान के पास वक्त नहीं- उनकी घड़ी बज रही है!

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि ईरान की नौसैना को हमने समुद्र में डुबो दिया है, उनकी एयरफोर्स तबाह हो चुकी है, उनके एंटी-एयरक्राफ्ट और रडार हथियार नष्ट हो गए हैं. उनके बड़े नेता मारे जा चुके हैं, नाकाबंदी पूरी तरह से सख्त और मजबूत है. इससे ईरान में हालात और भी बदतर होते जाते हैं.

उन्होंने ईरान के साथ समझौते की बात को दोहराते हुए कहा कि समझौता तभी होगा जब ये अमेरिका, हमारे सहयोगियों और वास्तव में पूरी दुनिया के लिए सही और फायदेमंद होगा.

हिंद महासागर पहुंचा एक और युद्ध पोत

वहीं, तनाव के बीच यूएसएस जॉर्ज एचडब्ल्यू बुश हिंद महासागर में पहुंच गया है, जिससे क्षेत्र में अब कुल तीन अमेरिकी विमानवाहक पोत तैनात हो गए हैं. यूएसएस अब्राहम लिंकन अरब सागर में और यूएसएस जेराल्ड आर फोर्ड लाल सागर में पहले से मौजूद हैं. वर्जीनिया से रवाना हुए ‘बुश’ ने अटलांटिक पार करने के बाद हॉर्न ऑफ अफ्रीका के चारों ओर घूमकर एक असामान्य रास्ता चुना जो अमेरिका की रणनीतिक तैयारियों को दिखाता है.

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