मन की शुद्धि के बिना सच्ची भक्ति संभव नहीं : अजय याज्ञनिक जी महाराज
ठाकुर जी को परिवार का सदस्य मानकर सेवा करना ही सच्ची भक्ति : पुनीत जी महाराज, लुधियाना
बच्चों में संस्कार विकसित करने के लिए रामचरितमानस की कथा जरूरी : नवनीतप्रिय दास जी
गाजियाबाद। गाजियाबाद के हिंदी भवन में संस्कार उपवन परिवार के तत्वावधान में चल रहे पाँच दिवसीय श्री भक्तमाल जयंती उत्सव के तीसरे दिन भी श्रद्धालुओं को भक्ति और संस्कारों से ओत-प्रोत प्रवचनों का लाभ प्राप्त हुआ। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में भक्तजन उपस्थित रहे।
परम श्रद्धेय नवनीत जी के सानिध्य में मुख्य यजमान राम अवतार जिंदल व अनिल गर्ग द्वारा प्रभु की पूजा कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।
इस अवसर पर परम पूज्य अजय याज्ञनिक जी महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि भगवान से भक्ति, बल और बुद्धि मांगने से पहले हमें अपने मन को कामनाओं और वासनाओं से शुद्ध करने की प्रार्थना करनी चाहिए। जब तक मन शुद्ध नहीं होगा, तब तक सच्ची भक्ति संभव नहीं है।
लुधियाना से पधारे पूज्य पुनीत जी महाराज ने भक्ति के स्वरूप को समझाते हुए कहा कि यदि हम अपने ठाकुर जी को अपने परिवार का सदस्य मान लें और परिवार की तरह ही उनकी सेवा-भावना रखें, तो वही सच्ची भक्ति है।
संस्कार उपवन के संस्थापक पूज्य श्री नवनीतप्रिय दास जी ने अपने संबोधन में कहा कि आज के समय में बच्चों में अच्छे संस्कार विकसित करने के लिए उन्हें रामचरितमानस की कथा और प्रसंग अवश्य सुनाने चाहिए। इससे उनके जीवन में धर्म, मर्यादा और आदर्शों की भावना विकसित होती है।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने संतों की वाणी का लाभ लिया और भक्तिमय वातावरण में भाव-विभोर हो उठे।
कार्यक्रम के मुख्य यजमान प्रदीप कुमार, शरद अग्रवाल, अनुराग गोयल, विनीत माहेश्वरी, रामनिवास बंसल आदि ने संतों से आशीर्वाद प्राप्त किया। कार्यक्रम की व्यवस्था में वेद प्रकाश बंसल, मुकेश कुमार, अतुल गुप्ता, आशीष सिंघल, मुकेश गोयल, विवेक गोयल, सीमा गोयल, राजकुमार सिंघल, संजय अग्रवाल, शशि श्रीवास्तव, शिखा माहेश्वरी आदि का विशेष सहयोग रहा।
अंत में सभी श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।


